सर्वोच्च न्यायालय ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें भाजपा से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले में दी गई आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी गई थी। न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया कि वह जेल में ही रहगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुलदीप सिंह सेंगर को नोटिस जारी कर सीबीआई की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले की जांच करेगी क्योंकि यह मामला विचार करने योग्य है।
पीठ ने कहा कि सेंगर को हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा। इस मामले में कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न विचारणीय हैं और मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया था, यह कहते हुए कि वह पहले ही सात साल और पांच महीने जेल में बिता चुके हैं। हालांकि कुलदीप सिंह सेंगर जेल में रहेंगे क्योंकि वह पीड़ित के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं।
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