सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि नीट की दोबारा परीक्षा ठोस स्तर पर होनी चाहिए और इससे पूरी परीक्षा की शुचिता प्रभावित होगी। मुख्य न्यायाधीश डी0 वाई0 चन्द्रचूड की नेतृत्व वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने आज नीट-यूजी 2024 मेडिकल प्रवेश परीक्षा के संचालन में हुई कथित अनियमितताओं से संबंधित 40 से अधिक याचिकाओं की सुनवाई शुरू की।
जांच के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो-सी बी आई की जांच जारी है। सी बी आई ने जो कुछ भी कहा है अगर इसका खुलासा होता है तो इससे जांच प्रभावित होगी और लोग इससे बचने के तरीके ढूंढेंगे।
मुख्य न्यायाधीश डी0 वाई0 चन्द्रचूड और न्यायाधीश जे0 डी0 पारदीवाला तथा मनोज मिश्रा की एक पीठ ने सामाजिक सरोकार के मद्देनजर नीट-यूजी 2024 की विवादित मेडिकल प्रवेश परीक्षा से संबंधित याचिकाओं पर निर्णायक सुनवाई की शुरूआत की।
पीठ ने 5 मई की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को रद्द करने, दोबारा परीक्षा करवाने और न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे यह प्रमाणित करें कि पेपर लीक “प्रणालीगत” थी और इसने पूरी परीक्षा को प्रभावित किया है, इसलिए इसे रद्द करना जरूरी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने पहले के दायर अपने हलफनामे में केन्द्र और राष्ट्रीय परीक्षा एजेन्सी-एन टी ए ने कहा था कि बड़े पैमाने पर गोपनीयता के खुलासे के किसी भी सबूत के अभाव में परीक्षा को रद्द करना अनुचित होगा और लाखों योग्य उम्मीदवारों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
इससे पहले न्यायाधीश जे0 बी0 पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह भी कहा था कि परीक्षा की शुचिता से छेडछाड की गई है। पीठ ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय अंतिम विकल्प होगा।
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