insamachar

आज की ताजा खबर

Suryapath Tiranga
भारत

50 से अधिक देशों से होकर गुजरी ‘सूर्यपथ तिरंगा’ वैश्विक रिले सैन फ्रांसिस्को में संपन्न

भारत के स्वतंत्रता दिवस के भव्य वैश्विक समारोह के अंतर्गत, हर घर तिरंगा 2026 की एक विशेष पहल ‘सूर्यपथ तिरंगा’ ने राष्ट्रीय ध्वज की भावना को पूरी दुनिया में पहुंचाया। यह पहल उगते सूर्य के पथ का अनुसरण करते हुए फिजी में भारतीय समयानुसार रात डेढ़ बजे से सैन फ्रांसिस्को में रात साढ़े आठ बजे भारतीय समयानुसार तक तक चली। इस अनूठे वैश्विक रिले ने विभिन्न देशों और महाद्वीपों में स्थित 54 मिशनों और पोस्टों को जोड़ा तथा सूर्य की गति को दुनिया भर में तिरंगे की प्रतीकात्मक यात्रा में परिवर्तित कर दिया।

फिजी के सुवा में भारतीय समयानुसार रात डेढ़ बजे से शुरू होकर तिरंगा न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया गणराज्य, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मालदीव से होकर गुजरा। इसके बाद यह रिले मध्य और पश्चिम एशिया की ओर बढ़ा, इसमें उज्बेकिस्तान, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब शामिल रहे। इसके पश्चात तिरंगा अफ्रीका और यूरोप पहुंचा। प्रत्येक स्थान पर तिरंगा फहराया जाना भारत के स्वतंत्रता दिवस के इस वैश्विक उत्सव की एक नई कड़ी का प्रतीक बना।

इसके बाद यह यात्रा इथियोपिया, रूस, केन्या, इजरायल, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका से होकर गुजरी और फिर यूरोप में लातविया, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, मोरक्को और आइसलैंड तक पहुंची। इसके बाद तिरंगे ने अटलांटिक महासागर पार किया और अमेरिका महाद्वीप में ब्राजील, सूरीनाम, गुयाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद ओर टोबैगो, डोमिनिकन गणराज्य, अमेरिका, कोलंबिया, कनाडा, जमैका, पेरू और मैक्सिको से होकर यात्रा की। रिले का निर्धारित अंतिम पड़ाव सैन फ्रांसिस्को था, जहां यह भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे पहुंचा।

इस प्रकार सूर्यपथ तिरंगा ने 19 घंटे से अधिक समय तक चलने वाले तिरंगा फहराने के समारोहों की एक उल्लेखनीय श्रृंखला बनाई। इसमें 54 मिशन/पोस्ट शामिल रहे। इसने प्रशांत क्षेत्र, एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका महाद्वीपों को भौगोलिक रूप से एक सूत्र में जोड़ा। प्रशांत क्षेत्र में दिन की पहली किरण से लेकर उत्तरी अमेरिका के शाम के आकाश तक, तिरंगा प्रतीकात्मक रूप से सूर्य के साथ यात्रा करता रहा और राष्ट्रीय गौरव, एकता तथा भारत की वैश्विक उपस्थिति का संदेश देता रहा।

इन समारोहों की एक प्रमुख विशेषता राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ होने वाली सामूहिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति रही। विभिन्न मिशनों और पोस्टों में भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ तथा राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ का सामूहिक गायन कार्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा रहा। इसमें भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों, अधिकारियों और भारत के मित्रों ने एक साथ शामिल लेकर देशभक्ति की साझा भावना व्यक्त की। यह पहल भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी विशेष महत्व प्रदान करती है। इसे इस वर्ष मनाया जा रहा है।

यह वैश्विक रिले हर घर तिरंगा 2026 का हिस्सा है, जिसे भारत और विदेशों में अभूतपूर्व भागीदारी के साथ मनाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य तिरंगे को भौगोलिक सीमाओं से आगे ले जाना और जहां कहीं भी भारतीय हों, उनके लिए इसे गौरव के साझा प्रतीक के रूप में स्थापित करना है। सूर्यपथ तिरंगा के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज अलग-अलग समय क्षेत्रों में हो रहे समारोहों को जोड़ने वाली कड़ी बन गया—एक तिरंगा, एक यात्रा, भारत की भावना में एकजुट विश्व।

यह पहल हर घर तिरंगा में भारतीय प्रवासी समुदाय तथा विदेशों में स्थित भारत के मिशनों और पोस्टों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है। प्रशांत द्वीपों से लेकर यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका तक, तिरंगा फहराने तथा वंदे मातरम् और जन गण मन के सामूहिक गायन ने उत्सव के एक साझा क्षण का निर्माण किया। यह भारत और उसके वैश्विक समुदाय के बीच कायम गहरे भावनात्मक संबंध को प्रदर्शित करता है।

सूर्यपथ तिरंगा दुनिया भर में भारत के लोगों के साथ उसके सदियों पुराने और स्थायी संबंध का दृश्य और प्रतीकात्मक रूप प्रस्तुत करता है। जिस प्रकार सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ता है, उसी प्रकार तिरंगा भी उसके पथ का अनुसरण करता हुआ महाद्वीपों के पार भारत का गौरव, विरासत और भावना लेकर आगे बढ़ता है।

‘सूर्यपथ तिरंगा’ वैश्विक रिले का प्रथम संस्करण अब सम्पन्न हो चुका है।

LEAVE A RESPONSE

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *