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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में भारत-ब्राजील सहयोग को घनिष्ठ बनाने के लिए ब्राजील के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठक की

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 फरवरी, 2026 को कृषि भवन में ब्राजील के कृषि एवं पशुधन मंत्री कार्लोस फावारो और ब्राजील के कृषि मंत्री लुइज़ पाउलो टेक्सीरा फेरेरा के साथ द्विपक्षीय बैठक की जिसमें दोनों पक्षों ने चल रहे सहयोग की स्थिति पर चर्चा की और भविष्य में सहयोग के क्षेत्रों की रूपरेखा भी तैयार की।

शिवराज सिंह चौहान ने भारत और ब्राजील के बीच गहरे और मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख किया जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील यात्रा सहित नियमित उच्च-स्तरीय बैठकों के माध्यम से मजबूत हुए हैं। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट में ब्राजील की भागीदारी की भी सराहना की और इसे तकनीकी सहयोग को घनिष्ठ बनाने की दिशा में एक कदम आगे बताया।

लुइज़ पाउलो टेक्सीरा फेरेरा ने कृषि और संबद्ध क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां पारस्परिक सहयोग लाभकारी होगा।

कार्लोस फावारो ने बायो-इनपुट के क्षेत्र में भारत के नवाचारों की सराहना की और कहा कि यह क्षेत्र आगे सहयोग और समन्वय के लिए विशेष महत्व रखता है।

दोनों देशों ने सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों पर चर्चा की और नई साझेदारी के संभावित क्षेत्रों का पता लगाया तथा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग को घनिष्ठ बनाने पर सहमति व्यक्त की।

शिवराज सिंह चौहान ने आगामी ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए ब्राजील के समकक्षों को भी निमंत्रण दिया।

कृषि मंत्रियों के अलावा ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल में कैबिनेट प्रमुख विल्सन गैम्बोगी पिंगेइरो टाकेस, ब्राजील दूतावास के कृषि परिचारक रॉबर्टो कार्लोस पापा, वाणिज्य और अंतर्राष्ट्रीय संबंध सचिवालय (एमएपीए) के सचिव लुइज़ रेनाटो डी अल्कांतारा रुआ, अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार मौरिसियो पोलिडोरो और प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य शामिल थे।

भारत की ओर से उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डीएआरई), दिनेश भाटिया, ब्राजील में भारत के राजदूत; अतिरिक्त सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू); कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, विदेश मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

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