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केंद्रीय कृषि मंत्र शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया जिसका उद्देश्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर देश भर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में व्यापक सुधार लाना है। यह बहु-साझेदार पहल भारत में समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कृषि को लाभकारी बनाना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है, इसलिए वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ‘प्रगति’ इसी सोच का विस्तार है जो किसानों को तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जोड़कर उनकी वास्तविक आय बढ़ाने का रास्ता तैयार करेगा।

यह पहल देश के प्रमुख कृषि राज्यों- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में लागू की जाएगी। कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीन सेवाएं, वित्तीय लिंक, बाजार कनेक्ट और वैकल्पिक आय के अवसर उपलब्ध कराएंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल खेती करने से काम नहीं चलेगा, हमें वैल्यू एडिशन और विविधीकरण की ओर बढ़ना होगा- बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों से किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि संभव है। उन्होंने तकनीक के उपयोग, ड्रोन, डिजिटल सलाह और वैज्ञानिक खेती को भविष्य का आधार बताया।

कार्यक्रम में महिला भागीदारी को विशेष महत्व देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में “कृषि सखी” और महिला उद्यमी इस बदलाव की धुरी बनेंगी और एक-एक उद्यमी पूरे गांव की तस्वीर बदल सकता है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “प्रगति” केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का संकल्प है। यह गांवों को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और सशक्त बनाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्यवार कृषि रोडमैप और वैज्ञानिक आधार पर फसल योजना के जरिए सरकार कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में काम कर रही है।

इस पहल को भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्व में सबसे बड़े कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ और समावेशी कृषि विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करेगा। प्रगति पहल में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ साझेदार के रूप में जुड़ी हैं जो मिलकर किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए एक समन्वित समर्थन तंत्र तैयार करेंगी। इस बहु-साझेदार गठबंधन में पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), गेट्स फाउंडेशन, IDH, Heifer International, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी, द सस्टेनेबल एग्रीकल्चर फाउंडेशन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन (SAFIA), एग्री एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) शामिल हैं। यह पूरा पार्टनर नेटवर्क मिलकर प्रशिक्षण, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन, बाजार संपर्क, तकनीकी सहायता और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी, सक्षम और जलवायु-सहनशील बनाने की दिशा में काम करेगा।

यह कार्यक्रम एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (एईजीएफ) द्वारा भारत के 14 राज्यों में क्रियान्वित पूर्ववर्ती कृषि-उद्यमिता पहलों से प्राप्त अनुभवों की नींव पर तैयार किया गया है। “प्रगति” का उद्देश्य मौजूदा 26,000 से अधिक कृषि-उद्यमियों के नेटवर्क के अतिरिक्त 20,000 कृषि-उद्यमियों का एक राष्ट्रव्यापी पारितंत्र तैयार करना है जिसमें समावेशी भागीदारी और क्षेत्र के भीतर संतुलित प्रतिनिधित्व पर विशेष बल दिया जाएगा। इस पहल से 20 लाख से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों के लाभान्वित होने की संभावना है जिनमें महिला किसानों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

इस पहल में भाग लेने वाले कम से कम 20% किसानों में पुनर्योजी कृषि पद्धतियों (Regenerative Agricultural Practices) को अपनाने को बढ़ावा देगी। साथ ही किसानों की आय में न्यूनतम 30% वृद्धि तथा धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उपज में 15-20% वृद्धि का लक्ष्य रखेगी। वित्तीय साक्षरता को सुदृढ़ करके तथा औपचारिक वित्तीय प्रणालियों तक पहुँच का विस्तार कर, “प्रगति” का लक्ष्य किसानों को अधिक सक्षम और समृद्ध भविष्य निर्मित करने हेतु सशक्त बनाना है।

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