नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित सामरिक समीक्षा एवं योजना बैठक (एसआरपीएम) में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक परिणामों की आज समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने की। बैठक में संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी, दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल, दूरसंचार विभाग (डीओटी) के वरिष्ठ अधिकारी, बीएसएनएल के मुख्य प्रबंध निदेशक ए. रॉबर्ट जे. रवि, बीएसएनएल बोर्ड के सदस्य और देश भर के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री ने बीएसएनएल के प्रदर्शन को “परिवर्तनकारी” बताया। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल ने सफलतापूर्वक 3-जी प्रदाता से एक प्रतिस्पर्धी 4-जी कंपनी के रूप में परिवर्तन किया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत के लिए यह ऐतिहासिक महत्व रखता है कि वह विश्व के उन चुनिंदा पांच देशों के समूह में शामिल हो गया है जिन्होंने पूर्णतः स्वदेशी दूरसंचार क्षमताएं विकसित की हैं।
कार्यवाही के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने बीएसएनएल के परिचालन मापदंडों का व्यापक मूल्यांकन किया, जिसमें सेवा की गुणवत्ता (क्यूओएस), ग्राहक आधार विस्तार, प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में वृद्धि और राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने बीएसएनएल की प्रमुख वित्तीय और तकनीकी उपलब्धियों की प्रशंसा की, विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में एआरपीयू में हुई उल्लेखनीय वृद्धि की, जो पिछले वर्ष के 71 रुपये से बढ़कर 101 रुपये हो गया है। यह वार्षिक आधार पर 42 प्रतिशत की वृद्धि है।
शीर्ष प्रदर्शन करने वाले सर्किल, वित्तीय वर्ष 2025-26
एसआरपीएम ने विभिन्न दूरसंचार सर्किलों और व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन को सम्मानित करने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य किया:
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रमुख क्षेत्र
केंद्रीय मंत्री महोदय ने सर्किल स्तर पर केंद्रित कार्यान्वयन, उत्तरदायित्व और कड़ी निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी केंद्रीय महाप्रबंधकों (सीजीएम) से उच्च प्रदर्शन करने वाले सर्किलों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का अनुकरण करने का आग्रह किया ताकि आने वाले वर्षों में निरंतर गति, बेहतर ग्राहक अनुभव और वित्तीय उत्कृष्टता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करने और स्वदेशी दूरसंचार प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए दूरसंचार उपकरण निर्माताओं के साथ निरंतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया।
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