केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के 71वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। यह समारोह स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एम्स के सात दशकों से अधिक के योगदान का प्रतीक है।
इस अवसर पर मौजूद लोगों सभा को संबोधित करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि “1956 में अपनी स्थापना के बाद से, एम्स नई दिल्ली ने देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक विशेष स्थान प्राप्त किया है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा को पुनर्परिभाषित करने, अभूतपूर्व अनुसंधान करने और उच्च गुणवत्ता वाली रोगी देखभाल प्रदान करने में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “दशकों से, एम्स नाम नैदानिक उत्कृष्टता और जनविश्वास का पर्याय बन गया है।” उन्होंने कहा कि संस्थान की एक गौरवशाली विरासत है, लेकिन यह विरासत भविष्य के लिए बड़ी जिम्मेदारी भी लाती है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्राथमिकताओं पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
अनुप्रिया पटेल ने देश के स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा परिदृश्य में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सदी की शुरुआत में केवल एक एम्स था, लेकिन अब यह बढ़कर 23 एम्स संस्थानों का नेटवर्क बन गया है। 2014 से मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 800 से अधिक हो गई है, जबकि स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या 51,000 से बढ़कर लगभग 1.3 लाख हो गई है, साथ ही स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की सीटों में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार इस ढांचे को और मजबूत करने के लिए 75,000 अतिरिक्त चिकित्सा सीटें जोड़ने की योजना बना रही है। यह विस्तार केवल संख्या बढ़ाये जाने का मामला नहीं है, बल्कि समानता और सुलभता से भी यह गहराई से जुड़ा हुआ है।
अनुप्रिया पटेल ने आगे जोर देते हुए कहा कि “गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा देश के हर क्षेत्र तक पहुंचनी चाहिए, उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवा नागरिकों के करीब लाई जानी चाहिए, और देश को डॉक्टरों, नर्सों, वैज्ञानिकों और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों का एक मजबूत समूह तैयार करना चाहिए जो बदलती जनसांख्यिकीय और महामारी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो।” उन्होंने कहा कि “इस परिवर्तन में एम्स नई दिल्ली की विशेष जिम्मेदारी है, क्योंकि यह सर्वोच्च मार्गदर्शक है और एक ऐसा संस्थान है जिसने देश के बाकी हिस्सों के लिए एक मानदंड स्थापित किया है।”
नई दिल्ली स्थित एम्स में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापकता के बारे में बात करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि संस्थान में होने वाले भारी नैदानिक कार्यों को केवल आंकड़ों के माध्यम से नहीं देखा जाना चाहिए। लाखों बाह्य रोगियों का आगमन लोगों और परिवारों का इस संस्थान पर जताए गए भरोसे को दर्शाते हैं, जबकि भर्तियां और शल्यक्रियाएं उन स्थितियों को दर्शाती हैं जिनमें रोगी अपना जीवन इसके डॉक्टरों, नर्सों और सहायक कर्मचारियों के हाथों में सौंपते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एम्स न केवल चिकित्सा उत्कृष्टता का केंद्र है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास का संस्थान भी है, और इस विश्वास को प्रतिदिन अर्जित और पोषित करना पड़ता है।
अनुप्रिया पटेल ने उन्नत चिकित्सा देखभाल और उभरती प्रौद्योगिकियों, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण और उन्नत निदान शामिल हैं, में एम्स की अग्रणी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि “प्रौद्योगिकी को बेहतर रोगी देखभाल का साधन बने रहना चाहिए और इसे मानवीय नैदानिक निर्णय का पूरक होना चाहिए, न कि उसका स्थान लेना चाहिए।” उन्होंने कहा कि “एआई किसी चिकित्सक की अंतर्ज्ञान शक्ति का स्थान नहीं ले सकता, रोबोटिक भुजा किसी सर्जन के निर्णय का स्थान नहीं ले सकती और प्रौद्योगिकी किसी नर्स की आश्वस्त करने वाली मानवीय उपस्थिति का स्थान नहीं ले सकती।” उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में वैज्ञानिक प्रगति और मानवीय स्पर्श के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर बल दिया।
अनुप्रिया पटेल ने इस बात पर भी जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा रोगी के समग्र अनुभव में भी झलकनी चाहिए। उन्होंने एम्स परिसर को नागरिकों के लिए सुगम बनाने का आह्वान किया और सहानुभूति, स्पष्ट संचार, गरिमा और रोगी-केंद्रित देखभाल के महत्व पर बल दिया। उन्होंने रोगी सुरक्षा के महत्व और सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने में डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों और प्रशासनिक कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया।
अनुप्रिया पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का विस्तार गुणवत्ता के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक नए वार्ड के लिए पर्याप्त नर्सिंग सहायता आवश्यक है, विशेष सेवाओं के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता होती है और डिजिटल पहलों से मरीजों की असुविधा को कम करने में मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास और गुणवत्ता साथ-साथ आगे बढ़नी चाहिए और एम्स नई दिल्ली को यह प्रदर्शित करना जारी रखना चाहिए कि विस्तार के साथ-साथ उच्च स्तर की रोगी देखभाल भी संभव है।
निवारक स्वास्थ्य देखभाल के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताएं विशेष रूप से गैर-संक्रामक और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के संदर्भ में रोकथाम, शीघ्र पहचान और समय पर इलाज पर केंद्रित हैं। रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन के प्रति नीतिगत दृष्टिकोण में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने एम्स से सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति, सामुदायिक स्वास्थ्य, जीवनशैली प्रबंधन और निवारक चिकित्सा में योगदान देने के लिए अपनी बौद्धिक संपदा का उपयोग करने का आह्वान किया।
अनुप्रिया पटेल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 और निवारक एवं संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं की ओर व्यापक बदलाव के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को देश में बदलती महामारी संबंधी चुनौतियों का समाधान करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध हों।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और कमजोर परिवारों को चिकित्सा उपचार के वित्तीय बोझ से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि एबी पीएम-जेएवाई ने आठ साल पूरे कर लिए हैं और 62 करोड़ से अधिक रोगी इसका लाभ ले चुके हैं। इससे गरीब और कमजोर पृष्ठभूमि के लोगों के लिए वित्तीय सुरक्षा मजबूत हुई है।
अनुप्रिया पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि एम्स नई दिल्ली को क्षमता विकास और स्वदेशी नवाचार के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में अधिकाधिक कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एम्स के प्रभाव को केवल परिसर में इलाज किए गए रोगियों की संख्या से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करके और एम्स स्तर की विशेषज्ञता को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाकर राष्ट्रीय स्तर पर विकसित क्षमता से भी मापा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि अनुसंधान को प्रयोगशाला और रोगी के बीच की खाई को पाटना चाहिए और उसे नैदानिक उपयोग और जनहित में बदलना चाहिए।
अनुप्रिया पटेल ने स्वदेशी चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के अधिक विकास, प्रमाणीकरण और कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत अनिश्चित काल तक आयातित चिकित्सा प्रौद्योगिकियों पर निर्भर नहीं रह सकता और शिक्षा जगत, अस्पतालों तथा भारतीय उद्योग को देश की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने एम्स से “एक ऐसे परितंत्र में योगदान देने का आह्वान किया जिसमें भारत न केवल उन्नत स्वास्थ्य समाधानों को अपनाए बल्कि उनका विकास भी करे।”
अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्यकर्मियों के स्वास्थ्य और कल्याण पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मरीजों के इलाज के साथ-साथ डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का स्वास्थ्य भी एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों में कम उम्र से ही स्वस्थ आदतों को विकसित करने और उनके कल्याण को बढ़ावा देने वाली संस्कृति को प्रोत्साहित करने के महत्व पर बल दिया।
अनुप्रिया पटेल ने एम्स नई दिल्ली से उन क्षेत्रों का निरंतर पता करने का आग्रह किया जहां सुधार किए जा सकते हैं। अनुप्रिया पटेल ने एम्स नई दिल्ली से “उन्नत नैदानिक देखभाल में और भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने, करुणापूर्ण स्वास्थ्य पेशेवरों की अगली पीढ़ी का पोषण करने, भारत की अनूठी स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने वाले अनुसंधान करने और संस्थानों के एक एकीकृत परिवार के रूप में व्यापक एम्स नेटवर्क का मार्गदर्शन करने” का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एम्स नई दिल्ली में विकसित देखभाल की गुणवत्ता और विशेषज्ञता का व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव होना चाहिए।
अनुप्रिया पटेल ने डॉक्टरों, नर्सों, शोधकर्ताओं, छात्रों, तकनीशियनों, फार्मासिस्टों, प्रशासकों, सफाईकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों सहित संपूर्ण एम्स परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया और संस्थान की उपलब्धियों में उनके सामूहिक योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने रोगी देखभाल को अधिक सुलभ, सुरक्षित और रोगी-केंद्रित बनाने का आह्वान किया, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी को उपचार के मूल में निहित मानवीय संबंधों को मजबूत करना चाहिए, न कि उन्हें प्रतिस्थापित करना चाहिए।
अपने समापन भाषण में अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एम्स नई दिल्ली का गौरवशाली अतीत और सशक्त वर्तमान है, लेकिन भारतीय स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने की इससे भी बड़ी जिम्मेदारी इस संस्थान पर है। उन्होंने संस्थान से भारत की जनता के लिए उत्कृष्टता, विश्वास, सामर्थ्य, नवाचार और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखने का आह्वान किया।
अनुप्रिया पटेल ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार भी वितरित किए।
स्थापना समारोह के एक भाग के रूप में, अनुप्रिया पटेल ने “एम्स: स्वास्थ्य सेवा नवाचार के सात दशक” प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी 95 पोस्टरों के माध्यम से एम्स की यात्रा और स्वास्थ्य सेवा एवं चिकित्सा नवाचार में इसके योगदान को प्रदर्शित करती है, जिसमें संस्थान भर में महत्वपूर्ण उपलब्धियों, पहलों और विकासों को उजागर किया गया है।
यह प्रदर्शनी स्वास्थ्य शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता पर भी केंद्रित है। 1,500 से अधिक स्कूली छात्र प्रदर्शनी में आएंगे और बीएमआई आकलन, स्वस्थ जीवनशैली और पोषण, रक्त शर्करा परीक्षण, आंखों की सामान्य समस्याएं, दंत एवं मौखिक स्वच्छता, अंगदान और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) पर आधारित संवादात्मक प्रदर्शनों और लाइव डेमो में भाग लेंगे, ताकि वे गंभीर रूप से बीमार रोगियों को दुरूस्त करना सीख सकें। यह प्रदर्शनी 25 से 27 सितंबर 2026 तक चलेगी।
स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए, एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉ. (प्रो.) निखिल टंडन ने संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली असाधारण रोगी देखभाल पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एम्स नई दिल्ली में 50 लाख से अधिक बाह्य रोगी आए, 3.5 लाख से अधिक रोगियों को भर्ती किया गया और लगभग 3 लाख सर्जरी की गईं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े देश भर के लोगों द्वारा संस्थान पर रखे गए अपार विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने नैदानिक देखभाल में हुई प्रमुख प्रगति पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 1000 से अधिक रोबोटिक सर्जरी की उपलब्धियां और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान में भारत के पहले रोबोट-सहायता प्राप्त गुर्दा प्रत्यारोपण का सफल निष्पादन शामिल है। एम्स ने अपनी डायलिसिस क्षमता को भी दोगुना कर दिया और 300 से अधिक अत्यंत जटिल सुपर-माइक्रोसर्जिकल प्रक्रियाएं संपन्न कीं।
डॉ. टंडन ने क्षमता विकास, डिजिटल स्वास्थ्य, अनुसंधान और स्वदेशी नवाचार में एम्स नई दिल्ली की बढ़ती राष्ट्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान ने वर्ष के दौरान लगभग 1,000 नए छात्रों का स्वागत किया और 300 से अधिक संकाय सदस्यों की भर्ती की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एम्स को डिजिटल स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन और क्षमता विकास पहलों के माध्यम से अपने परिसर से बाहर भी अपनी विशेषज्ञता का विस्तार करना चाहिए ताकि देश भर में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत किया जा सके।
इस अवसर पर एम्स, नई दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम सुंदर कोठारी, संकाय सदस्य, छात्र और एम्स नई दिल्ली के कर्मचारी उपस्थित रहे।
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