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केन्‍द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बिहार में अंतर्देशीय जलमार्ग बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने की घोषणा की

केन्‍द्रीय पत्‍तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बिहार में अंतर्देशीय जलमार्ग बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने की घोषणा की। ये घोषणाएं आज पटना में आयोजित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) पर अंतर्देशीय जलमार्ग विकास पर परामर्श कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में की गईं। यह इस तरह की पहली कार्यशाला थी।

परामर्श कार्यशाला की अध्यक्षता केन्‍द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की, जबकि इसमें केन्‍द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, बिहार की परिवहन मंत्री शीला कुमारी, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, पश्चिम बंगाल सरकार के सिंचाई एवं जलमार्ग मंत्री मानस रंजन भुनिया, पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से सांसद रविशंकर प्रसाद और आरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद सुदामा प्रसाद शामिल हुए। अधिकारियों में बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के अध्यक्ष विजय कुमार के साथ-साथ राज्य सरकार और केन्‍द्र सरकार के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।

कार्यशाला में केन्‍द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “आज, इस परामर्श कार्यशाला में, हम अपनी नदियों, विशेष रूप से राष्ट्रीय जलमार्गों को पुनर्जीवित करने के अपने सामूहिक प्रयास की पुष्टि करते हैं, ताकि वे हमारे भविष्य के विकास के इंजन बन सकें, न कि केवल हमारे अतीत का अवशेष। अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) परिवहन का सबसे स्वच्छ, सबसे अधिक किफायती और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ तरीका है।” गंगा नदी के पुनरुद्धार के संदर्भ में केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा, “मैं पवित्र नदी गंगा को नमन करता हूं – जो इस भूमि में जीवन, सभ्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा का शाश्वत स्रोत है। उसके बहते पानी में सदियों की संस्कृति, ज्ञान, आजीविका और निरंतरता निहित है। गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है; वह भारतीय उपमहाद्वीप की धड़कन है। और आज, जब हम पटना में एकत्र हुए हैं – जो उनके आलिंगन से पोषित शहर है – हम इस पवित्र नदी को राष्ट्र की विकास और परिवर्तन की आधुनिक यात्रा के साथ जोड़ने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।”

सर्बानंद सोनोवाल ने बिहार में अंतर्देशीय जलमार्गों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में प्रमुख पहल की घोषणा की। सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “पटना में जल मेट्रो की शुरुआत पर विचार किया जा रहा है, जो भौगोलिक स्थिति के आधार पर, पूर्ण अथवा कुछ हिस्‍सों में कोच्चि जल मेट्रो मॉडल की सफलता की नकल करेगा। प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य नदी के दोनों किनारों को जोड़ना और राजधानी शहर के लिए स्वच्छ, कुशल और आधुनिक शहरी गतिशीलता समाधान प्रदान करना है। इसके अलावा, एक मजबूत अंतर्देशीय पोत इकोसिस्‍टम में सहयोग करने के लिए पटना में एक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित की जाएगी। मरम्मत के अलावा, यह सुविधा नए जहाजों के निर्माण के लिए भी सुसज्जित होगी। ये विकास गंगा नदी को स्थायी शहरी परिवहन के लिए एक जीवन रेखा के रूप में पुनर्जीवित करने और पर्यावरण अनुकूल, नदी-केन्‍द्रित विकास को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय प्रयासों से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।”

केन्‍द्रीय मंत्री ने बिहार में गंगा नदी (एनडब्ल्यू-1) पर स्‍थायी विकास के अवसरों का पता लगाने के लिए बिहार सरकार, पत्‍तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा आईडब्ल्यूएआई के बीच एक संयुक्त कार्य बल की स्थापना की भी घोषणा की। पटना स्थित राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (एनआईएनआई) को सुविधाओं के आधुनिकीकरण और नई सुविधाएं जोड़ने के लिए नए निवेश के साथ उत्कृष्टता केन्‍द्र (सीओई) के रूप में अत्‍या‍धुनिक बनाया जा रहा है। एनआईएनआई अंतर्देशीय जल नौवहन के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्रीय संस्थान है।

एनडब्ल्यू-1 (गंगा) पर यात्री आवागमन को बढ़ावा देने के लिए, सर्बानंद सोनोवाल ने घोषणा की, “नरेन्‍द्र मोदी सरकार बिहार के लोगों के लिए अंतर्देशीय जल परिवहन को परिवहन के एक विश्वसनीय, कुशल और पर्यावरण अनुकूल साधन में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में मौजूदा 21 सामुदायिक जेटी के अलावा 16 नई सामुदायिक जेटी के साथ, प्रमुख जिलों में विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों, व्यापारियों और छोटे व्यवसायों को नदी आधारित बाजारों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी। पटना उत्तरी बिहार के लिए एक लॉजिस्टिक केन्‍द्र और नेपाल जाने वाले व्यापार के लिए कालूघाट टर्मिनल बनने के लिए तैयार है, जो सड़क और रेल नेटवर्क के साथ सहज रूप से जुड़ा होगा। चार स्थानों पर क्विक पोंटून ओपनिंग मैकेनिज्म (क्‍यूपीओएम) और दो रो-पैक्स टर्मिनलों के साथ-साथ दो हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामारैन जहाजों की तैनाती यात्रियों के लिए एक सहज, हरित और सस्ती यात्रा सुनिश्चित करती है। ये प्रयास मोदी सरकार की उस कल्‍पना को दर्शाते हैं जिसके तहत बिहार को स्‍थायी अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से स्वच्छ, हरित और अधिक जगहों से जोड़ा जा सकेगा । ये घोषणाएँ सिर्फ़ नीतिगत बयान नहीं हैं। वे हमारी मंशा की घोषणा हैं – कि गंगा से धन्य बिहार, अंतर्देशीय जल-आधारित वाणिज्य, पर्यटन और नवाचार का अग्रणी केन्‍द्र बनेगा। इन बुनियादी ढांचे के साथ, पटना गंगा नदी (एनडब्ल्यू 1) पर जल परिवहन केन्‍द्र के रूप में उभरेगा।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में 2014 से अंतर्देशीय जलमार्गों की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, केन्‍द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्गों में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। 2014 से कार्गो की आवाजाही में 700 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, परिचालन जलमार्गों में लगभग नौ गुना (800 प्रतिशत से अधिक) वृद्धि हुई है और निवेश में पाँच गुना (510 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। यह क्षेत्र अब हमारी मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है – जो अधिक वजनदार और बड़ी मात्रा में माल लाने-ले जाने के लिए सड़क और रेल के लिए एक स्वच्छ, किफायती विकल्प प्रदान करता है। नदी परिभ्रमण मार्गों में वृद्धि – 2013 से 333 प्रतिशत की शानदार वृद्धि – हमारे राष्ट्रीय जलमार्गों की बढ़ती पर्यटन संभावना को भी दर्शाती है।”

जनवरी 2018 में ₹5,061.15 करोड़ की लागत से स्वीकृत जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) का उद्देश्य राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (हल्दिया से वाराणसी) को 1,390 किलोमीटर के क्षेत्र में विकसित करना है, जिसमें सुगम नौवहन के लिए सुनिश्चित गहराई और चौड़ाई हो। मई 2025 तक, परियोजना मूल रूप से 68.86 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है, जिसमें गंगा की डॉल्फ़िन की सुरक्षा के लिए शून्य तरल कचरे, जैव-शौचालयों और पिंगरों जैसे पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ यातायात 2014-15 में 5.05 एमएमटी से 220 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 में 16.38 एमएमटी हो गया है। ।

जेएमवीपी के मुख्य घटकों में कार्गो टर्मिनलों का विकास, एनडब्ल्यू-1 के वाराणसी से हल्दिया खंड पर फेयरवे रखरखाव और नेविगेशनल लॉक शामिल हैं जो जहाज के पारगमन समय को कम करते हैं। इस परियोजना में प्रतिदिन 1.22 लाख यात्रियों की आवाजाही को सहारा देने वाली सामुदायिक जेटी, रसद लागत कम करने के लिए कार्गो एकत्रीकरण केन्‍द्र और देरी को कम करने के लिए त्वरित पोंटून खोलने की व्यवस्था (क्यूपीओएम) भी शामिल है। इसमें बढ़ते अंतर्देशीय जलमार्ग इकोसिस्‍टम में सहयोग के लिए जहाज मरम्मत केन्‍द्र, क्रूज टर्मिनल और प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्र ने नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है, जो 2014 में सिर्फ तीन (03) परिचालन राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्‍ल्‍यू) से बढ़कर आज 11 राज्यों में 29 परिचालन एनडब्‍ल्‍यू हो गए हैं। कुल 111 एनडब्‍ल्‍यू घोषित किए गए हैं, जो 23 राज्यों और 4 केन्‍द्र शासित प्रदेशों में फैले हैं, जिनकी संचयी नौगम्य लंबाई 20,187 किमी है। इस बढ़ते नेटवर्क में सहायतस के लिए, 124 टर्मिनल-जिसमें 27 स्थायी और 97 फ्लोटिंग टर्मिनल शामिल हैं- अब चालू हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय जलमार्गों पर कार्गो आवाजाही 145.84 मिलियन टन तक पहुंच गई, जो 2014 से 20.89 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025 में 85 प्रतिशत माल में कोयला, लौह अयस्क, कोक, रेत, फ्लाई ऐश, वाहन, यात्री, चूना पत्थर, क्लिंकर और सीमेंट शामिल थे, जिससे अंतर्देशीय जलमार्ग थोक और भारी माल ढुलाई के लिए एक प्रमुख साधन के रूप में सामने आया।

आईडब्ल्यूएआई वर्तमान में न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) का आकलन करने के लिए हर महीने 10,000 किलोमीटर का लम्‍बाई की दिशा में सर्वेक्षण कर रहा है, जिसका कवरेज वित्त वर्ष 24 में 11 राज्यों से बढ़कर वित्त वर्ष 27 तक 22 राज्यों और 4 केन्‍द्र शासित प्रदेशों तक पहुंचने वाला है। इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाते हुए, अगले पांच वर्षों के लिए पीपीपी पहलों सहित ₹35,000 करोड़ की परियोजना पाइपलाइन तैयार की गई है। सरकार की प्रतिबद्धता वार्षिक बजट में 48 प्रतिशत की वृद्धि से और भी स्पष्ट होती है, जो वित्त वर्ष 24 में ₹1,203 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में ₹1,752 करोड़ हो गई है।

परामर्श कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई), बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड सरकारों के शीर्ष अधिकारी भी उपस्थित थे।

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