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Union Textiles Minister Giriraj Singh inaugurated the Special Handloom and Handicrafts Exhibition and Sale at IITF, New Delhi
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केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने IITF, नई दिल्ली में विशेष हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी एवं बिक्री का उद्घाटन किया

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) में “विशेष हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी एवं बिक्री” का उद्घाटन किया । उद्घाटन वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

वस्त्र मंडप का उद्घाटन करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि विश्व में हथकरघा उत्पादों की माँग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह 15 दिवसीय व्यापार मेला हमारे कारीगरों के लिए सार्थक आर्थिक अवसर लेकर आएगा जिससे उनकी आजीविका में बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि हम अपने कारीगरों की कारीगरी को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए एक नया हब-एंड-एक्सपोर्ट मॉडल विकसित कर रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने प्रदर्शनी देखने के दौरान इसमें भाग लेने वाले बुनकरों और कारीगरों से बातचीत की। उन्होंने कच्चे माल के समर्थन से लेकर प्रौद्योगिकी एकीकरण, डिज़ाइन हस्तक्षेप और बाज़ार संपर्कों तक, संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मज़बूत करने के लिए भारत सरकार के निरंतर प्रयासों पर ज़ोर दिया। उन्होंने दोहराया कि बुनकरों और शिल्पकारों के लिए आय और आजीविका के अवसरों का विस्तार करने के लिए मंत्रालय प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे टिकाऊ हस्तशिल्प पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में भारत का नेतृत्व मज़बूत होगा ।

इस वर्ष के मंडप का विषय है “वस्त्र कला: भारत की विरासत” , जो उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की भौगोलिक यात्रा के माध्यम से भारत की अनंतकाल से चली आ रही शिल्प विरासत का उत्सव मनाता है – प्रत्येक क्षेत्र को स्पर्श, स्मृति और भक्ति की अपनी अनूठी हथकरघा शब्दावली के माध्यम से दर्शाया गया है।

मंडप में बताया गया है:

  • उत्तर – प्रतिबिंब और पैतृक अनुग्रह: गणेश, और राम दरबार की आकृतियों को प्रदर्शित करते हुए  चमकदार बनारसी बुनाई  की विशेषता, वंश और विरासत में मिली उत्कृष्टता का प्रतीक है।
  • दक्षिण – परिशुद्धता, भक्ति और मूर्तिकला अनुशासन: कर्नाटक और तमिलनाडु के दस्तकारों द्वारा लकड़ी, रेशम, धातु शिल्प में निपुणता  और नटराज की ब्रह्मांडीय लय  का प्रदर्शन।
  • पूर्व – स्मृति, निरंतरता और हाथ से बुनी हुई है वस्त्र : ओडिशा और बंगाल की परंपराओं का प्रदर्शन, जहां बुनाई जीवंत अनुभव और पहचान का प्रतीक है।
  • पश्चिम – दीप्यमान, उत्सव और रेगिस्तान की चमक: दर्पण कार्य, लिप्पन कला और नक्काशीदार लकड़ी का एक विस्फोट रेगिस्तान के लचीलेपन और उत्सव की भावना को दर्शाता है।

14 से 27 नवंबर 2025 तक आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम, हॉल नंबर 5, भारत मंडपम, नई दिल्ली में सुबह 10:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक जनता के लिए खुला रहेगा। 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 200 स्टॉल 53 अलग-अलग शिल्पों को प्रदर्शित करते हैं। मंडप का प्रबंधन राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) द्वारा किया जाता है ताकि हथकरघा बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सीधे बाजार तक पहुंच प्रदान की जा सके। प्रदर्शनी में कानी बुनाई और सजनी कढ़ाई कैसे की जाती है ये दिखाया जा रहा हैं। यह दर्शकों को भारत की दुर्लभ और उत्तम शिल्प परंपराओं की झलक प्रदान करते हैं। प्रदर्शनी में प्रतिष्ठित मास्टर कारीगरों को भी शामिल किया गया है।

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