संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का फैसला किया है। यह निर्णय पहली मई से लागू होगा। यूएई ने कहा है कि यह कदम राष्ट्रीय हित, उत्पादन क्षमता और दीर्घकालिक आर्थिक प्राथमिकताओं की समीक्षा के बाद लिया गया। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता है।
संयुक्त अरब अमीरात ने लगभग छह दशक बाद ओपेक को छोड़ने का फैसला किया है। इसे वैश्विक ऊर्जा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक का अंत माना जा रहा है। अबुधाबी 1967 में ओपेक में शामिल हुआ था तब संयुक्त अरब अमीरात नहीं बना था। समय के साथ संयुक्त अरब अमीरात ओपेक के सर्वाधिक प्रभावशाली सदस्यों में शामिल हो गया। सऊदी अरब और ईराक के बाद इसे तीसरा बड़ा तेल उत्पादक माना जाता है।
ईरान से जुड़े हाल के घटनाक्रम और होर्मुज जल-डमरू-मध्य के आसपास अस्थिरता से तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और संयुक्त अरब अमीरात की निर्यात क्षमता पर दबाव बना है। उत्पादन कोटे के बारे में लंबे समय से जारी मतभेदों को भी इसका कारण माना जा रहा है। ओपेक के लिए यह एक बड़ा धक्का है जबकि अमरीका के लिए इसे रणनीतिक लाभ के रूप में देखा जा रहा है। पहले ही अनिश्चितता का सामना कर रहे वैश्विक तेल बाजारों के लिए इस फैसले को नए और अप्रत्याशित दौर का संकेत माना जा रहा है।
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