संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया 1.5 डिग्री सेल्सियस के वैश्विक तापमान लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 2040 तक वैश्विक उत्सर्जन में लगभग 70 प्रतिशत की कमी करनी होगी
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी पहले के अनुमान से अधिक हो सकती है। इसमें अमरीका के पेरिस जलवायु समझौते से हटने का भी योगदान हो सकता है।
नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि सभी देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा भी कर लेते हैं, तब भी वर्ष 2100 तक वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में 2 दशमलव 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। यह पिछले वर्ष के अनुमान से शून्मलव दो डिग्री सेल्सियस अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में सबसे अधिक बढ़ोतरी अमरीका में दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, अमरीका की नीतियों में बदलाव से इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दुनिया पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य को हासिल करने में पीछे है। इस समझौते के तहत वैश्विक तापमान में वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे और संभव हो तो डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतरेस ने तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को सीमित करने के लिए वैश्विक उत्सर्जन में वर्ष 2030 तक 18 प्रतिशत और 2040 तक 69 प्रतिशत की कमी करना आवश्यक है।





