insamachar

आज की ताजा खबर

Vice President C.P. Radhakrishnan attended the 15th Graduation Day ceremony of the Sree Uthradom Thirunal Academy of Medical Sciences in Thiruvananthapuram.
भारत

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन तिरुवनंतपुरम में श्री उथराडोम थिरुनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के 15वें स्नातक दिवस समारोह में शामिल हुए

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज तिरुवनंतपुरम में श्री उथराडोम थिरुनल (एसयूटी) एकेडमी ऑफ मेडिकल साइसेंज के 15वें स्नातक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने केरलम के स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा परिदृश्य में एसयूटी एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के महत्वपूर्ण स्थान का उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “एक चिकित्सा संस्थान की वास्तविक शक्ति उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता, उसके द्वारा तैयार किए गए डॉक्टरों, उसके द्वारा किए जाने वाले अनुसंधान और उसके द्वारा रोगियों को प्रदान की जाने वाली सेवा में निहित है।”

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले डॉक्टर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐसे असाधारण दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल स्वास्थ्य, एजवांस्ड इमेजिंग और प्रिसिजन मेडिसिन इस क्षेत्र में बदलाव ला रहे हैं।

इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि संस्थान में रोबोटिक सर्जरी और कंप्यूटर-एडेड डायग्नोसिस सुविधाओं का शुभारंभ महत्वपूर्ण है तथा यह चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को तकनीकी प्रगति के अनुरूप बनाए रखने के महत्व को दर्शाता है।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी कभी भी चिकित्सा के मानवीय पहलू की जगह नहीं ले सकती है। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी एक डॉक्टर की मदद कर सकती है, लेकिन एक डॉक्टर के मानवीय पहलुओं की जगह नहीं ले सकती।” उन्होंने यह भी कहा, “मशीन विश्लेषण कर सकती है। रोबोट मदद कर सकता है। एल्गोरिदम पैटर्न की पहचान कर सकता है। लेकिन रोगी को अब भी ऐसे डॉक्टर की जरूरत है जो उसकी बात सुन सके, समझ सके, उसे भरोसा दिला सके और जिम्मेदारी ले सके।”

उपराष्ट्रपति ने ग्रेजुएट डॉक्टरों से सफेद कोट से जुड़े भरोसे को बनाए रखने का आग्रह किया; जिसके लिए बीमारी का सही पता लगाना, संवाद में ईमानदार होना, उपचार के दौरान सहानुभूति और प्रत्येक निर्णय में नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता और मानवीय संवेदना हमेशा साथ-साथ होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन की दिशा में भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि विकसित भारत तभी बन सकता है जब प्रत्येक राज्य, जिला और गांव का विकास हो, तथा यह भी उल्लेख किया कि उच्च शिक्षा तक पहुंच इस राष्ट्रीय विजन के केंद्र में है।

पिछले बारह वर्षों में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए, सी.पी. राधाकृष्णन ने बताया कि पहले जहां सिर्फ नई दिल्ली में केवल एक एम्स था, वहीं अब 12 नए एम्स स्थापित किए जा चुके हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने भारत भर में दीक्षांत समारोहों में भाग लिया है और यह सुखद बदलाव देखा है कि पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं डिग्रियां और पदक प्राप्त कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान स्नातक समारोह में 60 महिलाएं और 32 पुरुष स्नातक की उपाधि प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 5 महिलाएं और 2 पुरुष डॉक्टर स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक स्वागत योग्य कदम बताया।

स्नातक करने वाले डॉक्टरों को तीन मार्गदर्शक सिद्धांत देते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे आग्रह किया कि वे अपने दिमाग में ज्ञान, हृदय में करुणा और आचरण में ईमानदारी रखें।

उन्होंने स्नातकों से आत्मविश्वास के साथ विनम्र रहने, महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पालन करने, तकनीक के बेहतर उपयोग के साथ संवेदनशील रहने और समाज से जुड़े रहते हुए सफल होने का आग्रह किया। उन्होंने युवा डॉक्टरों से यह भी आग्रह किया कि वे “हमेशा नशीली दवाओं को ना कहें।”

अपने संबोधन का समापन करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने स्नातकों को एक सफल, सार्थक और संतोषजनक पेशेवर यात्रा की शुभकामनाएं दीं और कहा, “आप हमेशा यह याद रखें कि एक डॉक्टर होने का सबसे बड़ा सौभाग्य किसी दूसरे इंसान के जीवन में बदलाव लाने का अवसर मिलना है।” उन्होंने एसयूटी एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज की चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में निरंतर प्रगति की भी कामना की।

इस समारोह में तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर; केरलम सरकार की श्रम, पशुपालन और महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदु कृष्ण; एसयूटी एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अध्यक्ष डॉ. ए. सी. शनमुगम; केरल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मोहनन कुन्नूमल; संकाय सदस्य, कर्मचारी, स्नातक छात्र और उनके परिवार ने भाग लिया।

LEAVE A RESPONSE

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *