उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए और ‘कॉनफ्लुएंस 3.0’ का उद्घाटन किया
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कोच्चि में राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आरएसईटी) के रजत जयंती समारोह में भाग लिया और “इंडिया, इम्पैक्ट ऑफ एआई” विषय पर केन्द्रित उद्योग-शिक्षा शिखर सम्मेलन ‘कॉनफ्लुएंस 3.0’ का उद्घाटन किया।
केरलम की साक्षरता, सामाजिक विकास और मानव पूंजी के क्षेत्र में उपलब्धियों को उजागर करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि राजगिरी ने न केवल तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने में योगदान दिया है, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने संस्था के 25 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी और मूल्यों को तकनीकी उत्कृष्टता के साथ जोड़ने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
कार्मेलाइट्स ऑफ मेरी इमैक्युलेट (सीएमआई) के योगदान और संत कुरियाकोस एलियास चावरा की विरासत को याद करते हुए उन्होंने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण, महिला शिक्षा और वयस्क साक्षरता को बढ़ावा देने तथा यह सुनिश्चित करने के उनके अग्रणी प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि गरीबी और भूख शिक्षा के मार्ग में बाधा न बनें।
प्रौद्योगिकी-आधारित दुनिया की बदलती मांगों पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा, “हम रोजगार के अनुसार लोग तैयार नहीं कर रहे हैं; हमें बाजार की मांगों को समझना होगा।” उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और समस्या-समाधान पर अधिक जोर देने का आह्वान किया।
कॉनफ्लुएंस 3.0 की सराहना करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी और स्टार्ट-अप के वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित करने के लिए उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने भारत के मूल्यों से जुड़े रहते हुए नवोन्मेषी शिक्षण, अंतर्विषयक अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार उपयोग और सार्थक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।
पिछले कुछ दशकों में चीन में बदलाव का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उसकी प्रगति उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने केरलम से अनुसंधान-उन्मुख उच्च शिक्षा को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने वाला एक सुदृढ़ इकोसिस्टम तैयार करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री से अपील करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि केरलम में भूमि की सीमित उपलब्धता और भूमि की ऊंची लागत के कारण बड़े पारंपरिक उद्योग स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने उच्च-प्रौद्योगिकी और ज्ञान-आधारित उद्योगों पर अधिक ध्यान केन्द्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केरलम का मजबूत शैक्षिक आधार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन उच्च-प्रौद्योगिकी उद्यमों को आकर्षित कर सकता है, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित कर सकता है, पलायन को कम कर सकता है और लोगों को अपने मूल क्षेत्रों में वापस लौटने के लिए सक्षम बना सकता है।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से “मादक पदार्थों को ना कहें” का दृढ़ आह्वान किया। अपने बचपन के दौरान अपनी माता द्वारा दी गई सीख को याद करते हुए उन्होंने कहा कि क्षणिक सुख महान आशाओं और लक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों से अपनी क्षमताओं का उपयोग अपने, समाज और मानवता के कल्याण के लिए करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रशासनिक भवन की आधारशिला भी रखी। यह संस्थान की विकास यात्रा और शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
इस कार्यक्रम में केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर; केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन; पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी; केरलम सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन तथा आरएसईटी के प्रबंधन, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।





