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उपराष्ट्रपति ने चेन्नई में आयोजित इंडिया वाल्व्स 2026 सम्मेलन में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का शुभारंभ किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज चेन्नई में आयोजित इंडिया वाल्व्स 2026 में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री का शुभारंभ किया। यह राष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन वाल्वुलर और संरचनात्मक हृदय रोगों के उपचार को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है।

भारत और विदेश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों, हृदय शल्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नैदानिक ​​विशेषज्ञता, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और सहयोग का एक साथ आना मानवता की सेवा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हर मेडिकल प्रक्रिया, क्लिनिकल फ़ैसले और वैज्ञानिक विकास के पीछे आख़िरकार एक इंसान—एक मरीज़—होता है, जो ज़्यादा समय तक, सेहतमंद और सम्मान के साथ जीना चाहता है।

हृदय रोग चिकित्सा में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हालांकि वाल्वुलर और संरचनात्मक हृदय रोग एक महत्वपूर्ण और बढ़ती हुई चुनौती बने हुए हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति ने इन स्थितियों के इलाज के तरीके को बदल दिया है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चिकित्सा विज्ञान में हर प्रगति के साथ यह सुनिश्चित करने की नई जिम्मेदारी भी आती है कि इसके लाभ सभी के लिए सुलभ और समावेशी हों। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा एक मानवाधिकार है और यह सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने इंडिया वाल्व रजिस्ट्री के शुभारंभ को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हृदय वाल्व संबंधी सर्जरी करा रहे रोगियों, उनके उपचार और समय के साथ आने वाले परिणामों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप से दर्ज करके, वाल्व रजिस्ट्री व्यक्तिगत नैदानिक ​​अनुभवों को सामूहिक चिकित्सा ज्ञान में परिवर्तित कर सकती है।

सी.पी. राधाकृष्णन ने भारत-विशिष्ट नैदानिक ​​साक्ष्य जुटाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि कई देशों ने उन्नत वाल्व हस्तक्षेपों और अन्य हृदय संबंधी प्रक्रियाओं के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रियां विकसित की हैं और भारत में इस तरह की सहयोगात्मक पहल स्थापित करने के प्रयासों का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि इस तरह के रजिस्टर “हमारे देशवासियों के लिए हमारे देश का अपना डेटा” बनाने में मदद करेंगे और चिकित्सा समुदाय को परिणामों को बेहतर ढंग से समझने, चुनौतियों और कमियों की पहचान करने, अनुभव से सीखने और रोगी देखभाल में सुधार करने में सक्षम बनाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने चिकित्सा विशेषज्ञता और नवाचार के केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा पर प्रकाश डाला। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने न केवल अपने लोगों के लिए टीके विकसित किए बल्कि लगभग 100 देशों को टीके भी उपलब्ध कराए, जो भारत की बढ़ती चिकित्सा और तकनीकी क्षमताओं को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “हमारे डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने विश्व भर में सम्मान अर्जित किया है। भारत ने उन्नत चिकित्सा उपचार में उल्लेखनीय क्षमताएं प्रदर्शित की हैं।”

2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय लक्ष्य का जिक्र करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि एक विकसित भारत को एक स्वस्थ भारत भी होना चाहिए।

सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन का समापन करते हुए, एक ऐसे स्वास्थ्य सेवा तंत्र के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया, जिसमें नवाचार, प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक प्रगति को अंततः मानव जीवन को बेहतर बनाने की उनकी क्षमता के आधार पर मापा जाए।

इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण मंत्री थिरु के.जी. अरुणराज; अपोलो अस्पताल, चेन्नई के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जी. सेंगोट्टुवेलु; फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के कार्डियक साइंसेज के अध्यक्ष डॉ. अशोक सेठ; मेदांता-द मेडिसिटी, गुरुग्राम के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण चंद्र, साथ ही प्रख्यात कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डियक सर्जन, शोधकर्ता, वैज्ञानिक और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित हुए।

इंडिया वाल्व्स 2026 और इंडिया वाल्व रजिस्ट्री के बारे में

इंडिया वाल्व्स 2026 वाल्वुलर और संरचनात्मक हृदय रोग पर एक राष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन है, जो वैज्ञानिक आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए देश और विदेश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों, कार्डियक सर्जनों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों को एकजुट करता है।

इंडिया वाल्व रजिस्ट्री भारत भर में ट्रांसकैथेटर वाल्व हस्तक्षेपों पर वास्तविक दुनिया के डेटा के व्यवस्थित, सुरक्षित और पहचान रहित संग्रह के लिए एक सहयोगी बहु-केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य भारत-विशिष्ट नैदानिक ​​साक्ष्य को सुदृढ़ करना और रोगी देखभाल में सुधार करना है।

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