पीयूष गोयल ने भारत के लिए एक ट्रिलियन डॉलर का निर्यात लक्ष्य निर्धारित किया, केंद्र और राज्य से समन्वित प्रयास की अपील की
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राज्य सरकारों से भव्य औद्योगिक पार्क योजना का पूरा उपयोग करने एवं निर्यात को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया तथा भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। नई दिल्ली में आज एक दिवसीय बोर्ड ऑफ ट्रेड (बीओटी) बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने राज्यों, निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), उद्योग संघों एवं निर्यातकों के लिए भारत के निर्यात विकास में तेजी लाने के लिए सात-सूत्रीय कार्य योजना पेश किया।
बोर्ड ऑफ ट्रेड, वाणिज्य विभाग का शीर्ष परामर्शदात्री मंच है जिसकी बैठक पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद, बोर्ड ऑफ ट्रेड में शामिल हुए नए शामिल सदस्य, राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मंत्री और प्रतिनिधि, निर्यात संवर्धन परिषदें, शीर्ष उद्योग संगठन और गैर-आधिकारिक सदस्य उपस्थित हुए।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने पहले कार्य योजना के रूप में सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे निर्यात को उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने राज्यों, संबंधित मंत्रालयों, ईपीसी एवं उद्योग संघों से कहा कि वे निर्यात समितियां स्थापित करें, निर्यातकों के साथ नियमित बैठकें करें और मासिक समीक्षा बैठकों का आयोजन करें, जहां आवश्यक हो वहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकें आयोजित करें।
कार्य योजना के दूसरे एजेंडे के रूप में, पीयूष गोयल ने राज्यों से भव्य औद्योगिक पार्क योजना में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने का आग्रह किया, जिसके लिए पहला राउंड वर्तमान में खुला हुआ है। पीयूष गोयल ने उन राज्यों से भी आग्रह किया जिन्होंने अभी तक श्रम संहिता के अंतर्गत श्रम नियमों की अधिसूचना नहीं दी है कि वे इसे जल्द से जल्द पूरा करें तथा जमीन एवं श्रम को दो महत्वपूर्ण व्यापार सहयोगी बताया जिन पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
मंत्री के कार्य योजना का तीसरे एजेंडा गुणवत्ता अवसंरचना को मजबूत करने पर केंद्रित था। उन्होंने राज्यों एवं उद्योग को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार सरकारी, अर्ध-सरकारी एवं विश्वविद्यालय प्रयोगशालाओं में परीक्षण सुविधाओं की स्थापना में पूरा समर्थन देगा, जिससे परीक्षण की लागत बहुत कम हो जाएगा और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
कार्य योजना के चौथे एजेंडे के रूप में, पीयूष गोयल ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के अंतर्गत निर्यातकों, विशेषकर माइक्रो और छोटे उद्यमों के लिए उपलब्ध समर्थन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मिशन अंतरराष्ट्रीय अनुमोदन एवं प्रमाणपत्र प्राप्त करने में होने वाले खर्च के एक बड़े हिस्से का वित्तपोषण करेगा, जिनमें औषधीय, कृषि उत्पाद, एसपीएस और टीबीटी आवश्यकताएं, परीक्षण लागत एवं विकसित बाजारों में नियमों का पालन शामिल है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे बड़े पैमाने पर उत्पादन वाली स्थिति बनाने और उच्च गुणवत्ता एवं उच्च उत्पादकता वाली उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रोत्साहन संरचनाओं और औद्योगिक नीतियों को केंद्र सरकार की पहलों के अनुरूप बनाएं।
पांचवें कार्य योजना के अंतर्गत, केंद्रीय मंत्री ने अनुचित व्यापार प्रथाओं से प्रभावित उद्योगों को व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि डीजीटीआर घरेलू उद्योगों का समर्थन करेगा जो विदेशी उत्पादकों द्वारा डंपिंग या प्रीडेटरी प्राइसिंग के कारण नुकसान झेल रहे हैं और यह एंटी-डंपिंग उपायों, सेफगार्ड शुल्क एवं अन्य उपलब्ध व्यापार उपचार साधनों के माध्यम से राहत प्रदान कर सकता है। उन्होंने उद्योग की चिंताओं का समाधान करने के लिए डीजीटीआर की जन सुनवाई सहित आउटरीच प्रक्रिया पर बल दिया।
छठा कार्य योजना आयात प्रतिस्थापन पर केंद्रित था। पीयूष गोयल ने राज्यों एवं उद्योग से अनुरोध किया कि वे उन उत्पादों की पहचान करें जिनका वर्तमान में आयात होता है लेकिन जिन्हें भारत में प्रतिस्पर्धी रूप से बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल आयात निर्भरता को कम करेंगे एवं विदेशी मुद्रा बचाएंगे बल्कि घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेंगे एवं विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न जोखिमों को भी कम करेंगे।
सातवें कार्य योजना के रूप में, केंद्रीय मंत्री ने राज्यों एवं उद्योग संबद्धताओं से कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों एवं व्यापार प्रतिनिधिमंडलों में सक्रिय रूप से हिस्सा लें। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे उन संबद्धताओं एवं निर्यातकों की सूची तैयार करें जो विदेशी बाजारों की खोज में रुचि रखते हैं, विशेषकर नए निर्यातक और लघु एवं मध्यम उद्यम में। उन्होंने कहा कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन योग्य उद्यमों का समर्थन करेगा, उन्हें विदेशी प्रदर्शनियों एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार पहुंच में मदद करेगा ताकि वे भारत के बढ़ते हुए मुक्त व्यापार समझौतों के नेटवर्क का लाभ प्राप्त कर सकें।
पीयूष गोयल ने बैठक का व्यापक एजेंडा तय करते हुए बताया कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863 अरब अमेरिकी डॉलर का अब तक का सबसे ज़्यादा निर्यात किया। टैरिफ में बदलाव, माल ढुलाई में व्यावधान एवं वैश्विक मांग में कमी होने के बावजूद इसमें 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सामान का निर्यात लगभग 442 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर मज़बूती से बना रहा जबकि सेवाओं का निर्यात 421 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
केंद्रीय मंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रिकॉर्ड निर्यात पर बात करते हुए कहा कि यह कामयाबी कई बड़ी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद प्राप्त हुई है, जिनमें टैरिफ में बदलाव, माल ढुलाई में रुकावटें एवं मांग में कमी जैसी चुनौतियां शामिल हैं। पीयूष गोयल इस शानदार प्रदर्शन का श्रेय भारतीय निर्यातकों की मज़बूती, बाज़ारों में विविधता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किए गए बड़े सुधारों को दिया।
मंत्री ने ‘ज़िलों को निर्यात हब बनाने’ वाली पहल के अंतर्गत 90 दिनों का एक अभियान शुरू करने की घोषणा की। इसमें 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 120 प्राथमिकता वाले ज़िलों को शामिल किया जाएगा। 24 डीजीएफटी क्षेत्रीय प्राधिकरणों और 11 सहयोगी एजेंसियों की सहायता से चलने वाला यह अभियान मापनीय नतीजों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जैसे कि नए निर्यातकों का पंजीकरण और निर्यात मूल्य में बढ़ोतरी आदि। साथ ही, यह ‘एक ज़िला एक उत्पाद’ पहल, जीआई उत्पादों एवं एमएसएमई क्लस्टर के साथ भी तालमेल बिठाएगा।
सरकार के निर्यातकों के लिए समर्थन संरचना को उजागर करते हुए, पीयूष गोयल ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन को केंद्र में रखा, जिसे वाणिज्य, लघु एवं मध्यम उद्यम और वित्त मंत्रालयों द्वारा मिलकर 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के साथ लागू किया गया है और यह एमएसएमई-आधारित निर्यात वृद्धि का केंद्र है। यह मिशन अपने दो स्तंभों व्यापार वित्त के लिए ‘निर्यात प्रोत्साहन’ और बाजार पहुंच के लिए ‘निर्यात दिशा’ और 11 मध्यवर्तनों के माध्यम से निर्यातकों की पूरी यात्रा को कवर करता है जिसमें ऋण, संपार्श्विक, फैक्टरिंग, वेयरहाउसिंग, माल ढुलाई, अनुपालन, व्यापार खुफिया और ब्रांड इंडिया शामिल हैं।
बोर्ड ने भारत के व्यापार एवं औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख स्तंभों से संबंधित प्रस्तुतियों की समीक्षा की। इनमें शामिल हैं, भारत का मुक्त व्यापार समझौता जिन्होंने ऐसे बाज़ारों के लिए मार्ग खोले हैं जिनकी संयुक्त जीडीपी 27 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है; डीजीटीआर और उसका नया सेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म; सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), जहां खरीद 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है, जिसमें 45 प्रतिशत का लाभ एमएसएमई को मिला है; डीपीआईआईटी का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें 2.35 लाख से अधिक स्टार्टअप और फंड ऑफ फंड्स 2.0 शामिल हैं; 100 औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए 33,660 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली भव्य औद्योगिक पार्क योजना; कपड़ा मंत्रालय के विज़न 2030 का लक्ष्य निर्यात में 100 अरब अमेरिकी डॉलर; डेटा-सेंटर पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का घोषित निवेश; और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, जिसे एप्पल इंडिया के प्रबंध निदेशक विराट भाटिया द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें लगभग 6.25 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) से प्रेरित मोबाइल फोन उत्पादन को रेखांकित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने सीमा-पार ई-कॉमर्स को पहली बार निर्यात करने वालों के लिए सबसे आसान प्रवेश बिंदु बताया और राज्यों से आग्रह किया कि वे डाक घर निर्यात केंद्रों का लाभ उठाएं ताकि हर जिले को निर्यातक जिला बनाया जा सके। उन्होंने बल देकर कहा कि आयात प्रतिस्थापन एवं निर्यात प्रोत्साहन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से मेल खाने वाले उद्देश्य हैं और सरकार की परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया और कंटेनर निर्माण में बड़े अवसरों को रेखांकित किया।
बैठक के दौरान, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और प्रतिनिधियों ने राज्य-विशेष अनुभव, अच्छे अभ्यास एवं निर्यात संवर्धन पर अपने दृष्टिकोणों का साझा किया, साथ ही भारत के विदेशी व्यापार को मजबूत करने के लिए केंद्र की पहलों के समर्थन को फिर से दोहराया। निर्यात संवर्धन परिषदों, शीर्ष व्यापारिक निकायों एवं उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने भी भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सुझाव दिए।
मंत्री ने 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है, जिसमें लगभग 530 अरब अमेरिकी डॉलर का वस्तुओं का निर्यात एवं 470 अरब अमेरिकी डॉलर का सेवाओं का निर्यात शामिल है। उन्होंने इस लक्ष्य को महत्वाकांक्षी बताया लेकिन कहा कि केंद्र, राज्यों, उद्योग एवं निर्यातकों के आपसी सहयोग से इसे प्राप्त किया जा सकता है।
पीयूष गोयल ने केंद्र और राज्यों के बीच मज़बूत साझेदारी की वकालत करते हुए राज्यों से आग्रह किया कि वे निर्यात को अपने कामकाज के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल करें, बिना किसी देरी के राज्य निर्यात संवर्धन समितियों की बैठकें बुलाएं, ज़िला-स्तर पर निर्यात के प्रदर्शन की मासिक समीक्षा करें, नियम-कानून, टैक्स एवं अवसंरचना से जुड़ी बाधाओं को दूर करें, और एमएसएमई को बिना किसी रुकावट के मदद पहुंचाने के लिए राज्य-स्तरीय योजनाओं को केंद्र सरकार के कार्यक्रमों के साथ जोड़ें।
पीयूष गोयल ने आशा व्यक्त किया कि राज्यों के सम्मिलित प्रयासो, भारत के युवाओं के जोश एवं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ेगा।
इस बैठक में बिमल बोरा (असम), श्रेयसी सिंह (बिहार), मनजिंदर सिंह सिरसा (दिल्ली), सुभाष पाल देसाई (गोवा), कमलेश भाई पटेल (गुजरात), राव नरबीर सिंह (हरियाणा), हर्षवर्द्धन चौहान (हिमाचल प्रदेश), संजय प्रसाद यादव (झारखंड), चेतन्य कुमार कश्यप (मध्य प्रदेश), पी. यू. एफ. रोडिंगलियाना (मिजोरम), शेरिंग थेंडुप भूटिया (सिक्किम), हेकानी जखालू (नागालैंड), डी. श्रीधर बाबू (तेलंगाना), भरत सिंह चौधरी (उत्तराखंड), नंद गोपाल गुप्ता (उत्तर प्रदेश) और तापस रॉय (पश्चिम बंगाल) शामिल हुए।





