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सीएक्यूएम ने आगामी शीत ऋतु के दौरान वायु प्रदूषण की जांच के लिए तैयारियों की समीक्षा की

पूर्ण आयोग की 25वीं बैठक 17.10.2025 को सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। आयोग ने आगामी शीत ऋतु की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक के दौरान की गई समीक्षा में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक उत्सर्जन और क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के संबंध में जीआरएपी और वैधानिक निर्देशों का कार्यान्वयन भी शामिल था।

बैठक के दौरान जिन प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा और समीक्षा की गई उनमें शामिल हैं:

निर्देश संख्या 95 दिनांक 01.10.2025: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान (एनसीआर) तथा उत्तर प्रदेश (एनसीआर) के एनसीआर क्षेत्रों और दिल्ली के एनसीटी में उपायुक्तों / जिला कलेक्टरों / जिला मजिस्ट्रेटों को अधिकार दिया गया कि वे अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर, धान की पराली जलाने की घटनाओं को समाप्त करने की दिशा में प्रभावी प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार नोडल अधिकारियों तथा पर्यवेक्षी अधिकारियों और स्टेशन हाउस अधिकारियों सहित, विभिन्‍न अधिकारियों की निष्क्रियता के मामले में संबंधित क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करें।

आयोग ने हितधारकों द्वारा उठाई गई व्यावहारिक चुनौतियों और 26 सितंबर 2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश के मद्देनजर निर्देश संख्या 88 दिनांक 23.04.2025 की समीक्षा की, जिसमें आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहनों को पहले दी गई छूट को हटा दिया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुए, सीएक्‍यूएम ने निर्देश संख्या 88 में संशोधन करने का निर्णय लिया, जिसमें 01.11.2025 से दिल्ली में बीएस-VI, सीएनजी, एलएनजी और ईवी के अलावा किसी भी वाणिज्यिक माल वाहन जैसे एलजीवी, एमजीवी और एचजीवी के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया, उन वाहनों को छोड़कर जो दिल्ली में पंजीकृत हैं। हालांकि, सभी बीएस-IV वाणिज्यिक माल वाहन जैसे एलजीवी, एमजीवी और एचजीवी को संक्रमणकालीन उपाय के रूप में 31.10.2026 तक दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति है

सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर से ईओएल वाहनों के बड़े बेड़े के परिसमापन से संबंधित, दिनांक 23.04.2025 को संशोधित निर्देश संख्या 89 दिनांक 23.04.2025 की भी समीक्षा की। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 12 अगस्त 2025 के आदेश के मद्देनजर, जिसमें निर्देश दिया गया था कि 10 वर्ष पुराने (डीज़ल इंजन के मामले में) और 15 वर्ष पुराने (पेट्रोल इंजन के मामले में) वाहनों के मालिकों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, आयोग ने निर्देश संख्या 89 के कार्यान्वयन को अगले आदेश तक स्थगित रखने का निर्णय लिया।

इसके अलावा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 17 सितंबर 2025 के निर्देशों के बाद दिल्ली और एनसीआर राज्यों की सरकारों द्वारा तैयार की गई शीतकालीन कार्य योजनाओं की भी आयोग द्वारा समीक्षा की गई।

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के राज्य सरकार के अधिकारियों को पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखने, सीआरएम मशीनों के इष्टतम उपयोग के लिए कदम उठाने, बाह्य अनुप्रयोगों के लिए आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की निगरानी सुनिश्चित करने, प्रभावी प्रवर्तन उपाय करने और आईईसी अभियान को तेज करने के लिए कहा गया।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एनसीआर के निकटवर्ती क्षेत्रों में सक्रिय आग की घटनाओं की उच्च संख्या को उजागर किया गया और उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान की राज्य सरकारों को पराली जलाने की घटनाओं को समाप्त करने के लिए पड़ोसी जिलों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।

खुले में एमएसडब्ल्यू और बायोमास जलाने की शिकायतों के संबंध में, आयोग ने निर्देश दिया कि सभी राज्यों को, विशेष रूप से इस अवधि के दौरान, ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए और 24 घंटे के भीतर इन्‍हें हल करना चाहिए।

सीएक्यूएम ने 15 अक्टूबर 2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख किया, जो 18 से 20 अक्टूबर 2025 तक एनसीआर में केवल निर्दिष्ट स्थानों पर ही ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति देता है, जिन्हें जिला पुलिस अधीक्षक के परामर्श से डीसी/डीएम द्वारा चिन्हित किया जाएगा। बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों तक ही सीमित रहेगी और बाहर से एनसीआर में पटाखों की बिक्री और ई-कॉमर्स नेटवर्क के माध्यम से बिक्री या खरीद प्रतिबंधित रहेगी। दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति केवल सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे और रात 8:00 बजे से 10:00 बजे के बीच ही है। बेरियम यौगिक या श्रृंखला में जुड़े पटाखों (लडि़यों) जैसी प्रतिबंधित सामग्रियों का उपयोग या बिक्री सख्त वर्जित है। जिला स्तरीय गश्ती दलों को जमीनी स्तर पर सख्त प्रवर्तन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा, सीपीसीबी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और एनसीआर के अंतर्गत आने वाले जिलों में उनके संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के परामर्श से, 14.10.2025 से 25.10.2025 तक अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक की निगरानी करेगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के क्षेत्रीय कार्यालय, वायु गुणवत्ता की निगरानी के साथ-साथ, पटाखों के अधिक उपयोग वाले स्थानों से विश्लेषण के लिए रेत और पानी के नमूने भी एकत्र करेंगे।

सभी कार्यान्वयन एजेंसियां ​​वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई करने, जीआरएपी के अंतर्गत सहित, के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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