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CCRAS ने साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद की जानकारी को 13 भाषाओं में सुलभ बनाने के लिए AICTE द्वारा विकसित अनुवादिनी एआई के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद की जानकारी को 13 भाषाओं में सुलभ बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा विकसित अनुवादिनी एआई के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य पूरे देश में साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद ज्ञान को बडे पैमाने पर लोगों तक पहुंचाना है। इस समझौता ज्ञापन के तहत, अनुवादिनी एआई सीसीआरएएस के अनुसंधान परिणामों और शैक्षिक सामग्रियों का हिंदी सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करेगी।

सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य रबीनारायण आचार्य और अनुवादिनी एआई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर ने इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन उन्नत भाषा प्रौद्योगिकी और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान के महत्वपूर्ण संगम को दर्शाता है।

अनुवादिनी एआई तकनीकी, वैज्ञानिक और शासन सम्‍बंधी ज्ञान को विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवादित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य विश्वसनीय, शोध-आधारित जानकारी की सुलभता, भाषाई या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से परे नागरिकों तक सुनिश्चित करना है।

देश के 25 राज्यों में 30 संस्थानों के नेटवर्क के साथ, सीसीआरएएस आयुर्वेद विज्ञान में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रकाशित करता है। इसका एक प्रमुख प्रकाशन, सीसीआरएएस बुलेटिन, एक त्रैमासिक शोध पत्रिका है, जो अन्य सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री के साथ वर्तमान में मुख्य रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित होती है। समझौता ज्ञापन के तहत, अनुवादिनी एआई इन शोध परिणामों और शैक्षिक संसाधनों के 13 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद में सहायता करेगी, जिससे प्रामाणिक आयुर्वेद ज्ञान की पहुँच व्यापक जनसमुदाय तक बढ़ाने और भ्रामक सूचना को जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर, सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर रबीनारायण आचार्य ने कहा कि यह सहयोग आयुर्वेद अनुसंधान के परिणामों से न केवल अकादमिक समुदाय बल्कि देश भर के नागरिकों को उनकी संबंधित भाषाओं में लाभ पहुंचाने के लिए सीसीआरएएस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर ने कहा कि अनुवादिनी एआई विशेष रूप से ऐसे सहयोगों का समर्थन करने के लिए विकसित किया गया था, जहां प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए ज्ञान को अधिक सुलभ, न्यायसंगत और सशक्त बनाने में मदद करती है।

भविष्य में विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है। इसकी शुरुआत उन देशों की भाषाओं से होगी जहां सीसीआरएएस ने अकादमिक केन्‍द्र स्थापित किए हैं। इस पहल से प्रामाणिक आयुर्वेद ज्ञान की वैश्विक पहुंच का विस्तार होगा।

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