केंद्र सरकार ने घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकी बदलाव की चुनौतियों से निपटने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे। जनगणना आयुक्त के साथ-साथ पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आर्इ्रपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि को इस समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव इस समिति में सदस्य सचिव के रूप में काम करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को लाल किले से जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की थी। मैं आज देश के सामने एक चिंता, एक चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं। सह–षडयंत्र के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है। एक नये संकट के बीज बोये जा रहे हैं और ये घुसपैठिये मेरे देश के नौजवानों की रोजी–रोटी छीन रहे हैं। ये देश सहन नहीं करेगा और इसलिए एक हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का निर्णय किया है।
ये उच्च स्तरीय समिति अवैध अप्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से पूरे देश में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक आकलन करेगी। यह धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या स्थानांतरण का भी विश्लेषण करेगी और इसके लिए एक योजनाबद्ध और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति की घोषणा की थी। समिति एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। वहीं, आवश्यकता पड़ने पर समिति का कार्यकाल 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है।
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