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केंद्र ने गोवा, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड में ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत करने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान के तहत 137 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गोवा, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड राज्यों में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अबंधित अनुदान जारी किए हैं। इस विज्ञप्ति में विभिन्न वित्तीय वर्षों से संबंधित आवंटन शामिल हैं और इसका उद्देश्य ग्रामीण स्थानीय शासन को और मजबूत करना है।

गोवा राज्य के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के अबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में दो पात्र जिला पंचायतों (डीपी) और 191 पात्र ग्राम पंचायतों (जीपी) के मद में 11.60 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2023-24 की पहली किस्त के रोके गए हिस्से के रूप में 2.979 करोड़ रुपये की राशि दो अतिरिक्त पात्र जिला पंचायतों और 24 ग्राम पंचायतों के लिए जारी कर दी गई है। मेघालय के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के अबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 27.00 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिसमें खासी, गारो और जयंतिया की तीनों पात्र स्वायत्त जिला परिषदें शामिल हैं।

सिक्किम राज्य के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के अबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 6.60 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिससे छह पात्र जिला पंचायतों और 199 ग्राम पंचायतों को लाभ होगा। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली किस्त के रोके गए हिस्से के रूप में 0.165 करोड़ रुपये की राशि भी राज्य में एक अतिरिक्त पात्र जिला पंचायत को जारी कर दी गई है। वहीं उत्तराखंड राज्य के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के अबंधित अनुदान की पहली किस्त के रूप में 89.4117 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसमें 13 जिला पंचायतें (डीपी), 95 ब्लॉक पंचायतें (बीपी) और 7,568 पात्र ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त मंत्रालय के अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय इन्हें जारी करता है। आवंटित अनुदानों की सिफारिश की जाती है और एक वित्तीय वर्ष में ये राशि दो किस्तों में जारी की जाती है। अबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थाएं/ग्रामीण स्थानीय निकाय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार करेंगे। यह राशि संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित उनतीस विषयों के अंतर्गत खर्च की जा सकेगी, लेकिन वेतन और अन्य स्थापना संबंधी खर्चों पर इसका उपयोग नहीं किया जा सकेगा। बंधित अनुदानों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है, जिनमें (क) स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना शामिल है और इसमें विशेष रूप से घरेलू कचरे का प्रबंधन एवं उपचार और मानव मल मूत्र एवं इससे संबंधित अपशिष्ट का प्रबंधन शामिल है तथा (ख) पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन एवं जल पुनर्चक्रण शामिल हैं।

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