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विज्ञान संचार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति अनुसंधान में सहयोग को मजबूती प्रदान करने के लिए CSIR-NISPR और NIAS ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया

सीएसआईआर-राष्‍ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्‍थान(सीएसआईआर-निस्‍पर), नई दिल्‍ली ने 25 मई 2026 को राष्ट्रीय प्रगत अध्ययन संस्थान(एनआईएएस), बेंगलुरु के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। इस समझौता ज्ञापन(एमओयू) का उद्देश्य विज्ञान संचार और सार्वजनिक सहभागिता तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी(एस-एंड-टी) नीति अनुसंधान में सहयोग को मजबूत करना है। यह सहयोग संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय और शोधार्थियों के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यक्रमों के आयोजन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देगा।

एनआईएएस के निदेशक डॉ. शैलेश नायक ने अपने स्वागत भाषण में विज्ञान संचार को मजबूत करने के लिए संस्थागत सहयोग के महत्व और संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सीएसआईआर-निस्पर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने समावेशी विज्ञान संचार के महत्व, लक्षित समुदायों के लिए प्रभावी तरीके से सामग्री तैयार करने और विज्ञान में जन सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग के महत्व पर चर्चा की। डॉ. रायसम ने भारतीय भाषाओं में संचार के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के नैतिक उपयोग की प्रासंगिकता पर भी जोर दिया।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह के बाद “डिजिटल युग में समावेशी विज्ञान संचार: प्राथमिकताएं, प्रथाएं और नीतियां” विषय पर एक विचार-मंथन चर्चा का आयोजन किया गया।इस चर्चा में एनआईएएस से प्रो. डी.के. श्रीवास्तव, प्रो. संजय श्रीवास्तव, प्रो. रजनी एम.बी., प्रो. शिशिर रॉय, डॉ. अनंत कामथ और डॉ. वी.वी. बिनॉय; निस्पर से डॉ. गीता वाणी रायसम, डॉ. कस्तूरी मंडल और डॉ. परमानंद बर्मन; गुब्बी लैब्स से डॉ. एच.एस. सुधीरा और आईआईएससी के सीएसपी से डॉ. सूर्येश के. नामदेव ने अपने विचार साझा किए। पैनल के सदस्यों ने जिम्मेदार और समावेशी विज्ञान संचार को मजबूत करने के लिए मौजूद कमियों और प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला और भारतीय परिप्रेक्ष्य के अनुरूप विज्ञान संचार नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य सुझावों में विज्ञान में विश्वास को बढ़ावा देना, विज्ञान संचारकों और पत्रकारों को प्रशिक्षित करना, गलत सूचनाओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना, सार्वजनिक बुद्धिजीवियों का एक बड़ा समुदाय तैयार करना, स्कूलों में विज्ञान संचार को मजबूत बनाना, नागरिक विज्ञान को लोकप्रिय बनाना, प्रभावी दिशा-निर्देशों को विकसित और लागू करना तथा वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं तथा संचारकों के बीच बात-चीत को बढ़ावा देना शामिल है।

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