रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक स्तर पर स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत आतंकी हमले होने की स्थिति में अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता से बंधा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने केवल इरादों और बयानबाजी से आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के माध्यम से अपनी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का दृढ़ रुख है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खतरे के खिलाफ सरकार के दृढ़ रुख का प्रमाण बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा, “आतंकवाद विकृत और कुटिल मानसिकता से उपजता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है; यह मूल रूप से मानवता के मूलभूत मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ लड़ाई है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश और विदेश दोनों जगह व्यक्त किया है।”
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि के लिए खतरा बना रहेगा। उन्होंने कहा, “आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उसे जायज ठहराने की कोशिश की जाती है। यह बेहद खतरनाक है और एक तरह से आतंकवादियों को अपने लक्ष्य की ओर धीरे-धीरे बढ़ने में मदद करता है। आतंकवाद सिर्फ राष्ट्रविरोधी कृत्य नहीं है; इसके कई आयाम हैं – परिचालन, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों से निपटें।”
आतंकवाद को पाकिस्तान के लगातार दिए जा रहे समर्थन पर राजनाथ सिंह ने कहा: “भारत और पाकिस्तान दोनों को एक ही समय में स्वतंत्रता मिली। हालांकि, आज भारत को वैश्विक स्तर पर आईटी यानी सूचना प्रौद्योगिकी के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार की आईटी यानी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र माना जाता है।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय रक्षा बलों की एकजुटता और तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एक एकीकृत योजना के तहत मिलकर काम किया, जिससे यह स्पष्ट रूप से साबित हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-थलग नहीं है; बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान, हमने पूरी सटीकता के साथ केवल उन्हीं लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हम पर हमला किया था। हमने ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका क्योंकि हमारी क्षमताएं खत्म हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर रोका। हम लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष को जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता है और अचानक संकट के क्षणों में अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति भी है।”
राजनाथ सिंह ने इस तथ्य पर जोर दिया कि भारत के सैन्य-औद्योगिक परिसर ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह न केवल शांति काल की जरूरतों को पूरा करने के लिए, बल्कि युद्धकाल में तीव्र आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की मांगों को पूरा करने के लिए भी तत्पर है। उन्होंने कहा कि उस दौरान भारत ने छल या परमाणु हमले की धमकी के आगे घुटने नहीं टेके और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया। उन्होंने कहा, “यह ‘नई विश्व व्यवस्था’ है; इस नए वैश्विक युग का ‘नया भारत’ है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसका समर्थन करने वालों में कोई भेद नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत को बदल दिया है।”
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि हालांकि यह ऑपरेशन मात्र 72 घंटों में पूरा हो गया, लेकिन इससे पहले की तैयारियां व्यापक और लंबी थीं। उन्होंने बताया कि भारत की आपातकालीन क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता, ये सभी प्रतिरोध की रणनीति के अभिन्न अंग बन गए हैं।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के प्रत्यक्ष परिणाम स्वरूप स्वदेशी हथियारों और रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति वैश्विक धारणा और सकारात्मक दृष्टिकोण में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, “कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि है। हम इन मानकों को पार करने के अपने प्रयासों को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
जर्मनी की अपनी हालिया यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यूरोप भर की प्रमुख कंपनियां हमारी निजी रक्षा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने आगे कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति न केवल उसकी सैन्य शक्ति से, बल्कि प्रतिरोध स्थापित करने की क्षमता से भी मजबूत हुई है।
प्रतिरोध के स्वरूप में हो रहे तेज बदलाव पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी अभिन्न अंग बन गए हैं, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इस प्रतिमान परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई को हर जगह अत्यंत प्रभावी ढंग से तैनात किया गया है। इसने हमारी सटीकता और आक्रमण क्षमताओं को बढ़ाया है। हालांकि प्रमुख अभियानों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, लेकिन अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं हैं जो खतरों को उनके वास्तविक रूप लेने से पहले ही बेअसर करने के लिए सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।”
रक्षा मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अनुप्रयोग की व्यावहारिकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक जवाब देने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। उन्होंने कहा, “एआई का अर्थ ‘संवर्धित पैदल सेना’ भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा रही है। आधुनिक युद्ध की मांगों को ध्यान में रखते हुए, हम अपनी सेना को प्रौद्योगिकी-संचालित और एकीकृत युद्धक मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए, सेना ने ‘रुद्र’ ब्रिगेड, ‘भैरव’ बटालियन, ‘शक्तिबान’ तोपखाना रेजिमेंट और ‘दिव्यास्त्र’ बैटरी जैसी चुस्त और आत्मनिर्भर लड़ाकू इकाइयां स्थापित की हैं, जो आधुनिक हाइब्रिड खतरों का तत्काल और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि एआई कार्य संस्कृति को बदलने, हमारे सैनिकों का हित सुनिश्चित करने और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने का एक शक्तिशाली साधन बनकर उभरा है। उन्होंने रक्षा पेंशनभोगियों और पूर्व सैनिकों के लिए विकसित स्पर्श पोर्टल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एआई-सक्षम चैटबॉट के माध्यम से पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं को काफी सरल बनाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि शिकायत निवारण से लेकर चिकित्सा रिकॉर्ड की निगरानी तक, सभी पहलुओं का प्रबंधन एआई-संचालित प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि एआई-आधारित उपकरणों का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि सैनिकों के परिवार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के मामले में कभी पीछे न रहें।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था में एआई भारत की रणनीतिक तैयारियों का एक अनिवार्य घटक बन रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पहल को केवल सेना तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पूरे देश में कौशल विकास और अनुसंधान के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। उन्होंने कहा, “’इंडियाएआई’ मिशन के माध्यम से, हम पूरे देश में कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का सक्रिय रूप से लोकतंत्रीकरण कर रहे हैं, जिससे छोटे से छोटे शहरों के युवा भी एआई में योगदान दे सकें। 10,000 से अधिक जीपीयू क्षमता, फ्यूचरस्किल्स कार्यक्रम जैसी पहल और डेटा एवं एआई लैब की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि हम तकनीकी क्रांति के इस युग में पीछे नहीं रहना चाहते। हमने हाल ही में सफलतापूर्वक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन किया, जहां 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ 89 देशों और संगठनों ने हमारे एआई घोषणापत्र का समर्थन किया। आज, भारत वैश्विक एआई मानकों को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। हम ‘सभी के लिए एआई’ के मंत्र से प्रेरित हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि इसके लाभ कुछ चुनिंदा देशों तक ही सीमित न रहें, बल्कि विकासशील देशों (वैश्विक दक्षिण) तक भी पहुंचें।”
राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल आशावादी नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नई और गंभीर चुनौतियां पेश करती हैं। उन्होंने कहा, “हमें इन चुनौतियों को गंभीरता से ध्यान में रखना होगा, क्योंकि आने वाले समय में ये और भी तीव्र होने वाली हैं। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो हमारी सुरक्षा के लिए बनाया गया उपकरण ही अंततः विनाश का हथियार बन सकता है। इसलिए, हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें गुमराह करने वाली शक्ति के बजाय हमारा मार्गदर्शन करे। सामूहिक प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्धक्षेत्र की निगरानी और स्वायत्त प्रणालियों से लेकर लॉजिस्टिक्स अनुकूलन और कमान निर्णय समर्थन तक, विभिन्न क्षेत्रों में एआई की भूमिका का गहन अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सुदर्शन वायु रक्षा प्रणाली एक विशाल परियोजना है जो एआई के अनुकरणीय अनुप्रयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा साइंस का लाभ उठाते हुए, हमारी रक्षा बलों ने एआई-आधारित उभरती चुनौतियों के जवाब में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। यह रणनीति भविष्य में उन्हें और भी अधिक अनुकूलनीय और प्रतिक्रियाशील बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। ऐसी नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से, हमारा राष्ट्र न केवल अधिक सुरक्षित होगा बल्कि अधिक मजबूत और समृद्ध भी बनेगा।”
इस कार्यक्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित उपस्थित थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 वर्षीय बालिका को 30 सप्ताह का गर्भ चिकित्सकीय रूप से हटाने…
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत…
समावेशी ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण…
भारत में बासमती चावल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम…
अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमरीका ने संकेत दिया है कि…
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय नौसेना ने ओडिशा में बंगाल की खाड़ी…