भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने आम आदमी पार्टी सरकार की शराब नीति से संबंधित रिपोर्ट में कहा है कि इस नीति के कारण सरकारी खजाने को दो हजार करोड़ से अधिक रूपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा दिल्ली विधानसभा में आज पेश की गई रिपोर्ट में दिल्ली में शराब की आपूर्ति के विनियमन और निगरानी करने वाले आबकारी विभाग के तरीकों में कई विसंगतियां उजागर हुई हैं। इसमें कहा गया है कि थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, होटलों, क्लबों और रेस्तरांओं को जारी किए गए लाइसेंस में नियमों की अनदेखी की गई है। विभाग ने विभिन्न प्रकार के लाइसेंस जारी करने में नियम और शर्तों तथा आबकारी नियमों से संबंधित विभिन्न आवश्यकताओं की जांच किए बगैर लाइसेंस जारी किए हैं।
दो सौ से अधिक पन्नें की रिपोर्ट में गलत निरीक्षण रिपोर्ट से लेकर कारण बताओं नोटिस की कमी। शराब नीति में क्षेत्रीय लाइसेंस धारियों से सुरक्षा जमा की गलत वसूली और शराब नीति में अन्य खामियां शामिल हैं। केन्द्रीय लेखा परीक्षक ने पिछली सरकार में शराब की गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को उजागर किया। उसे शराब नीति के कार्यान्वयन में आई समस्याओं के बारे में रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ रिटेलर में नीति की अवधि समाप्त होने तक लाइसेंस बनाए रखें वहीं कुछ ने नीति अवधि समाप्त होने से पहले ही लाइसेंस लौटा दिए। जिससे आपूर्ति में विघटन हुआ और लगभग 9 सौ करोड रूपए का राजस्व नुकसान हुआ। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 2017-18 से अब तक कैग की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने संविधान में कैग रिपोर्ट से संबंधित प्रावधानों का उल्लंधन किया। सदन में रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी विधायक अरविंद सिंह लवली ने आरोप लगाया कि पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया।
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