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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, सरकार पश्चिम एशिया में उभरते घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही है

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि सरकार पश्चिम एशिया में उभरते घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही है। पश्चिम एशिया की स्थिति के संबंध में राज्यसभा में बयान देते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए संबंधित मंत्रालय समन्वय कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि सरकार का मानना ​​है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने इस वर्ष जनवरी में ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की चेतावनी दी थी और उनसे भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराने तथा उचित सावधानी बरतने को कहा था।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सुरक्षा समिति इस संघर्ष और क्षेत्र में भारतीयों को हो रही कठिनाइयों को लेकर चिंतित है। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं और सभी मंत्रियों को इस मुद्दे से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सदन को सूचित किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, ओमान, जॉर्डन, इस्राएल और बहरीन के राष्ट्राध्यक्षों से बात की और सभी से स्थिति को शांत करने का आग्रह किया।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा, तेल और गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है और खाड़ी क्षेत्र भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जिससे सालाना लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है।

उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर समुद्री जहाजों पर भी पड़ता है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल शामिल हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष अन्य देशों में भी फैल गया है, जिससे भारी तबाही हो रही है और सामान्य जीवन और गतिविधियां स्पष्ट रूप से प्रभावित हो रही हैं।

डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारतीय दूतावास ने तेहरान में फंसे कई भारतीय छात्रों को वापस लाने में मदद कर रहा है और व्यापार के सिलसिले में ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया जाने और भारत लौटने में सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह से कार्यरत है और हाई अलर्ट पर है। उन्‍होंने बताया कि लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस लौट रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया से लोगों को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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