देश भर में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ आज चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ संपन्न हो गया। आज सुबह श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घय दिया। यह वैदिक काल से चला आ रहा है। यह पर्व ऋग्वेद में वर्णित सूर्य तथा उषा पूजन और सनातन परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। भारत में सूर्यदेव की पूजा ऋगवैदिक काल से होती आ रही है। सूर्य उपासना का जिक्र विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से किया गया है।
बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान सहित अन्य प्रमुख नदियों के किनारे बने छठ घाटों पर श्रद्धालुओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। बिहार में आज सुबह विभिन्न छठ घाटों पर लाखों की संख्या में छठव्रतियों और श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को कमर भर पानी में खड़े होकर ऊषाकालीन अर्घ्य अर्पित किया। उसके बाद छठव्रतियों ने भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना कर पारण किया और उनका 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत भी संपन्न हुआ। छठ घाटों पर इस दौरान लोगों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया। राजधानी पटना में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा नदी के किनारे बने विभिन्न घाटों पर भगवान सूर्य को और छठी माता को अर्घ्य अर्पित किया। औरंगाबाद जिले के देव, नालंदा के ओंगारी धाम, पटना जिले के ओलार्क, नवादा के हरिया सूर्य मंदिर सहित विभिन्न सूर्य मंदिरों पर भी आयोजित छठ महोत्सव का आज समापन हो गया।
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