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सरकार ने 208 अन्य कार्बन-गहन उद्योगों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन गहनता लक्ष्य अधिसूचित किए

भारत सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) के तहत अतिरिक्त कार्बन-गहन क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन गहनता (जीईआई) लक्ष्य अधिसूचित किए हैं। 13.01.2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र उद्योग और द्वितीयक एल्युमीनियम को भारतीय कार्बन बाजार (आईसीएम) के अनुपालन तंत्र के तहत लाया गया है।

इन क्षेत्रों में कुल 208 बाध्य संस्थाओं को अब निर्दिष्ट उत्सर्जन तीव्रता में कमी के लक्ष्यों को पूरा करना होगा। इस विस्तार के साथ, आईसीएम का अनुपालन तंत्र अब भारत के सबसे अधिक उत्सर्जन-गहन उद्योगों में 490 बाध्य संस्थाओं को कवर करता है। भारत सरकार ने सबसे पहले अक्टूबर 2025 में एल्युमीनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली और पल्प एंड पेपर क्षेत्रों के लिए जीईआई लक्ष्य अधिसूचित किए थे, जिनमें 282 बाध्य संस्थाएं शामिल थीं।

भारत सरकार द्वारा 2023 में अधिसूचित सीसीटीएस,आईसीएम के कामकाज के लिए एक समग्र ढांचा प्रदान करता है। सीसीटीएस का मकसद कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र व्यापार तंत्र के ज़रिए उत्सर्जन का मूल्य निर्धारण करके भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना या उससे बचना है।

सीसीटीएस दो तंत्रों के ज़रिए संचालित होता है: अनुपालन तंत्र और ऑफसेट तंत्र। अनुपालन तंत्र के तहत, उत्सर्जन-प्रधान उद्योगों को बाध्य संस्थाओं के रूप में नामित किया जाता है और उन्हें निर्धारित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (जीईआई) लक्ष्यों को पूरा करना अनिवार्य है। जो बाध्य संस्थाएं अपने लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं, वे कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए पात्र होती हैं, जिनका वे उन बाध्य संस्थाओं के साथ आदान-प्रदान कर सकती हैं, जो अपने लक्ष्यों को पूरा करने में असमर्थ हैं।

यह प्रगति उद्योगों के साथ वर्षों के निरंतर जुड़ाव, कठोर तकनीकी मूल्यांकन और संस्थानों एवं हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों का नतीजा है। जैसे-जैसे क्षेत्रीय कवरेज गहराता जा रहा है और अनुपालन तंत्र परिपक्व हो रहा है, आईसीएम भारत के दीर्घकालिक जलवायु उद्देश्यों और नेट-जीरो लक्ष्य के साथ औद्योगिक विकास को संरेखित करने में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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