बिज़नेस

भारतीय डाक ने पहली तिमाही में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का अब तक का सबसे अधिक राजस्व अर्जित किया

डाक विभाग ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) के लिए अपनी तिमाही व्यवसाय समीक्षा बैठक (बिजनेस रिव्यू मीटिंग) आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने की। इसमें संचार राज्यमंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी भी मौजूद थे। इस अहम बैठक में पहली तिमाही के दौरान विभाग के व्यवसाय संबंधी कामकाज की समीक्षा और व्यवसाय में बदलाव के लिए भारतीय डाक के बदलते रोडमैप पर चर्चा करने हेतु देश भर के विभिन्न डाक परिमंडलों (पोस्टल सर्कल्स) के प्रमुख शामिल हुए।

विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए, केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि भारतीय डाक ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत सकारात्मक तरीके से की है। कुल 19,803 करोड़ रुपए के वार्षिक राजस्व के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की तुलना में, विभाग ने पहली तिमाही में 4,009 करोड़ रुपये अर्जित किए। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि है और पहली तिमाही के लक्ष्य का 81 प्रतिशत है।

भारतीय डाक परिवार के सभी सदस्यों को उनके समर्पण और अटूट निष्ठा के लिए बधाई देते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने देश भर के कर्मचारियों के उन अथक प्रयासों की सराहना की जिनसे विभाग की सेवाओं की आपूर्ति बेहतर हुई है और इसके निरंतर विकास में योगदान मिला है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल रूप से सशक्त और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार डाक नेटवर्क के विजन के तहत आधुनिकीकरण, व्यवसाय से जुड़े बदलावों और ग्राहक-केन्द्रित सेवाओं की आपूर्ति की दिशा में विभाग की निरंतर कोशिशों को दर्शाती है।

केन्द्रीय मंत्री ने व्यवसाय के सभी 6 अंगों – डाक, पार्सल, डाक जीवन बीमा /ग्रामीण डाक जीवन बीमा (पीएलआई/आरपीएलआई), डाकघर बचत बैंक (पीओएसबी), अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं वैश्विक व्यवसाय (आईआर एंड जीबी) और नागरिक-केन्द्रित सेवाओं (सीसीएस) – के कामकाज की समीक्षा की। कुल मिलाकर अच्छे प्रदर्शन की सराहना करते हुए, उन्होंने निम्नलिखित मुख्य उपलब्धियों पर जोर दिया और विभाग को निर्देश दिया कि वे अच्छा प्रदर्शन करने वाले परिमंडलों द्वारा अपनाए गए बेहतरीन तरीकों को आगे बढ़ाएं:

  • व्यवसाय के विभिन्न अंगों में से, नागरिक-केन्द्रित सेवाओं (सीसीएस) ने वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर सबसे अधिक 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद पार्सल (50 प्रतिशत), डाक (42 प्रतिशत), अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं वैश्विक व्यवसाय (आईआर एंड जीबी) (34 प्रतिशत) डाक जीवन बीमा /ग्रामीण डाक जीवन बीमा (पीएलआई/आरपीएलआई) (20 प्रतिशत) और डाकघर बचत बैंक (पीओएसबी) (10 प्रतिशत) का स्थान रहा। इससे विभाग के व्यापारिक गतिविधियों (बिजनेस पोर्टफोलियो) में व्यापक वृद्धि का पता चलता है।
  • भारतीय डाक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) में 4,951 करोड़ रुपये के तिमाही लक्ष्य की तुलना में 4,009 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। यह लक्ष्य का 81 प्रतिशत है और वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही की तुलना में इसमें वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल मिलाकर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले तीन डाक परिमंडल रहे

व्यवसाय के विभिन्न अंगों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले परिमंडल और लक्ष्य की तुलना में उनकी प्रतिशत उपलब्धियां इस प्रकार रहीं:

• नागरिक केन्द्रित सेवाएं: पश्चिम बंगाल (107 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (106 प्रतिशत)।

• पार्सल: बिहार (121 प्रतिशत), तमिलनाडु (115 प्रतिशत)

• डाक: आंध्र प्रदेश (106 प्रतिशत)।

• पीएलआई/आरपीएलआई: पश्चिम बंगाल (97 प्रतिशत), जम्मू एवं कश्मीर (96 प्रतिशत)।

• पीओएसबी: छत्तीसगढ़ (124 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (110 प्रतिशत) और झारखंड (107 प्रतिशत)।

• आईआर एंड जीबी: केरल (83 प्रतिशत), राजस्थान (81 प्रतिशत)।

केन्द्रीय मंत्री ने डाक नेटवर्क की कामकाज की क्षमता की समीक्षा की और शाखा डाकघरों (बीओ) की शुरुआत में वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर हुए बड़े सुधार पर गौर किया। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) के दौरान, पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में, पीओएसबी में शून्य व्यावसायिक लेनदेन वाले बीओ की संख्या में 92 प्रतिशत से अधिक, पीएलआई/आरपीएलआई में 97 प्रतिशत और स्पीड पोस्ट व पार्सल में 99 प्रतिशत की कमी आई। जमीनी स्तर पर व्यवसाय बढ़ाने में हुए शानदार सुधार की सराहना करते हुए, केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने सभी डाक परिमंडलों को हर शाखा डाकघर में खास निगरानी, ​​ग्राहकों तक पहुंच और बेहतर व्यवसाय सृजन के जरिए इस गति को बनाए रखने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, विभाग की वित्तीय स्थिरता की समीक्षा करते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (क्यू1) के दौरान ‘व्यय कवरेज अनुपात’ (ईसीआर) में सुधार हुआ है – यह पेंशन सहित 28 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत और पेंशन को छोड़कर 41 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गया है। यह संचालन संबंधी दक्षता और वित्तीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार को दर्शाता है। उन्होंने ईसीआर को बेहतर बनाने में दिल्ली, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के शानदार प्रदर्शन की सराहना की और सभी परिमंडलों को खर्च में अनुशासन बनाए रखते हुए राजस्व बढ़ाने के प्रयासों को और मजबूत करने का निर्देश दिया।

केन्द्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने व्यवसाय के अलग-अलग अंगों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले डाक परिमंडलों की सराहना की। उन्होंने सभी परिमंडलों को एक-दूसरे से सीखने (पीयर लर्निंग) के जरिए सफल व्यवसाय मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने राज्यों को तीन क्लस्टर में बांटकर क्लस्टर-आधारित तरीका अपनाने का सुझाव दिया, ताकि हर क्लस्टर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की किसी खास श्रेणी पर ध्यान दे सके और इससे लक्षित उपाय करने, जानकारी साझा करने और बेहतर नतीजे पाने में मदद मिल सके। पहली तिमाही में हुई प्रगति की सराहना करते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि पार्सल, डाक और आईआर एंड जीबी बिजनेस वर्टिकल में बाकी तिमाहियों के दौरान खास ध्यान देने और उपाय करने की जरूरत है। उन्होंने संबंधित परिमंडलों को नए ग्राहक बनाने पर अधिक जोर देने, कॉरपोरेट एवं संस्थागत ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत करने, रणनीतिक साझेदारियां बढ़ाने और नियमित निगरानी व समय पर सुधारात्मक कदम उठाकर काम को बेहतर ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विभाग के बड़े व्यावसायिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मासिक प्रदर्शन की समीक्षा, डेटा-आधारित निर्णय लेना, अधिक जवाबदेही और फील्ड-स्तर पर काम को मजबूती से पूरा करना बेहद अहम होगा।

संचार राज्यमंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने विभाग के कामकाज में आए बड़े सुधार की सराहना की। उन्होंने इसका श्रेय नियमित समीक्षा, व्यवस्थित निगरानी और देश भर के डाक कर्मचारियों की प्रतिबद्धता को दिया। उन्होंने कहा कि यह ठोस वृद्धि केन्द्रित नेतृत्व, जवाबदेही और सामूहिक प्रयासों के परिवर्तनकारी असर को दिखाता है। सभी डाक परिमंडलों से अनुशासित कामकाज, टीम वर्क और लगातार निगरानी के जरिए इस गति को बनाए रखने का आग्रह करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर परिमंडल का लगातार अच्छा प्रदर्शन विभाग के बड़े राजस्व लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ भारतीय डाक की सेवाओं की आपूर्ति, लोगों तक पहुंच तथा संस्थागत बदलाव को और अधिक मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी होगा।

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