भारत

भारतीय रेल ने विभिन्न रेलवे जोन में सुरक्षा प्रणाली कवच लगाने और सिग्नलिंग आधुनिकीकरण के लिए 1,364.45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए

भारतीय रेल ने अपने समूचे नेटवर्क में सुरक्षा, सिग्नलिंग और संचार ढांचे को सुदृढ बनाने के लिए 1,364.45 करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इनमें लोकोमोटिव (रेल इंजन) में कवच लगाना, ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क का विस्तार और विभिन्न रेलवे जोन में पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से बदलना शामिल है।

दक्षिण रेलवे के 232 इंजनों में कवच उपकरण लगाए जाएंगे

भारतीय रेल ने दक्षिण रेलवे के 232 लोकोमोटिव इंजन में कवच उपकरण लगाने के लिए 208.81 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव “भारतीय रेल के शेष मार्गों पर लॉन्ग-टर्म इवोल्यूशन संचार व्यवस्था के साथ कवच का प्रावधान अंब्रेला कार्य का हिस्सा है, जो 2024-25 की कार्य योजना (“रेलवे के कार्य, मशीनरी और रोलिंग स्टॉक कार्यक्रम” पिंक बुक) में शामिल है और जिसकी कुल लागत PH-33 (वर्क्स प्रोग्राम 2024-25″ के तहत प्रमुख वित्तीय आवंटन मद) के तहत 27,693 करोड़ रुपये है।

कार्यक्रम के अंतर्गत दक्षिण रेलवे के लिए 2,950 करोड़ रुपये का उप-आवंटन किया गया है। वर्तमान कार्य इसी उप-आवंटन के तहत प्रस्तावित है और इसमें इंजन में कवच का चौथा संस्करण लगाना शामिल है।

उत्तर रेलवे में 2×48 आप्टिकल फाइबर संचार नेटवर्क के साथ संचार व्यवस्था सुदृढ बनाई जाएगी

भारतीय रेलव ने उत्तर रेलवे में संचार आधारभूत संरचना सुदृढ बनाने के लिए कुल 400.86 करोड़ रुपये की लागत से तीन कार्यों की स्वीकृति दी है। ये कार्य “भारतीय रेल में संचार आधारभूत संरचना सुदृढ बनाने, मरम्मत कार्य और कलपुर्जे बदलने (अम्ब्रेला वर्क 2024-25)” नामक व्यापक परियोजना का हिस्सा हैं, जिसे PH-33 के तहत 4,871 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है।

उत्तर रेलवे के लिए 871 करोड़ रुपये का उप-अम्ब्रेला प्रावधान किया गया है। इसके तहत तीन कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें अंबाला मंडल में 926.05 किलोमीटर मार्ग पर 2×48 फाइबर केबल बिछाने का कार्य 115.74 करोड़ रुपये की लागत से; दिल्ली मंडल में 1,204 किलोमीटर मार्ग पर 2×48 फाइबर केबल बिछाने और स्टेशनों पर ऑप्टिकल फाइबर संचार केन्द्र स्थापित करने का कार्य 165.49 करोड़ रुपये की लागत से और लखनऊ मंडल में 1,074 किलोमीटर मार्ग पर 2×48 फाइबर केबल बिछाने का कार्य 119.63 करोड़ रुपये की लागत से किया जाना शामिल हैं।

इनका उद्देश्य विभिन्न विभागों में संचार प्रणालियों की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ाना है, जो आधुनिक सिग्नलिंग और कवच स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उत्तर मध्य रेलवे में कवच के लिए ऑप्टिकल फाइबर संचार व्यवस्था 2,196 किलोमीटर मार्ग में स्थापित की जाएगी।

भारतीय रेल ने उत्तर मध्य रेलवे में कवच लाइन पर 2×48 फाइबर ऑप्टिकल फाइबर संचार केबल बिछाने के लिए 176.7699 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह कार्य भारतीय रेलवे के संचार तंत्र को सुदृढ़ बनाने, मरम्मत कार्य और कजपुर्जे बदलने की व्यापक परियोजना के अंतर्गत किया जाएगा।

उत्तर मध्य रेलवे के लिए 200 करोड़ रुपये का उप-क्षेत्रीय आवंटन किया गया है। इसके अंतर्गत 2,196 किलोमीटर के मार्ग में प्रयागराज मंडल में 1,016 किलोमीटर, झांसी मंडल में 709 किलोमीटर और आगरा मंडल में 471 किलोमीटर के मार्ग पर उपरोक्त कार्य शामिल हैं।

यह परियोजना कवच लगाने में सहायता के साथ ही अधिक यातायात वाले मार्गों पर संचार के बुनियादी ढांचे में सुधार लाएगी।

दक्षिण मध्य रेलवे में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कार्यों को मंजूरी

भारतीय रेल ने दक्षिण मध्य रेलवे में पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से बदलने के लिए कुल 578.02 करोड़ रुपये की लागत से दो कार्यों को मंजूरी दी है। ये कार्य हब एंड स्पोक परिवहन नेटवर्क हैं जो प्रमुख शहरों को छोटे शहरों से जोड़ते हैं। मार्गों पर शेष स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था जहां कवच/ एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम / केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण स्वीकृत है और 2024-25 नामक अंब्रेला परियोजना के अंतर्गत आते हैं, जिसे सिग्नलिंग और दूरसंचार कार्य PH-33 के तहत 15,164 करोड़ रुपये की लागत से अनुमोदित किया गया है।

दक्षिण मध्य रेलवे के लिए 1,857 करोड़ रुपये के उप-अम्ब्रेला आवंटन के तहत दो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें गुंटकल मंडल में उच्च घनत्व नेटवर्क -एचडीएन और अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले नेटवर्क-एचयूएन मार्गों पर स्थित 35 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदलने की 426.82 करोड़ रुपये की परियोजना है और नांदेड़ मंडल में एचडीएन/एचयूएन मार्गों पर स्थित 14 स्टेशनों पर 151.20 करोड़ रुपये इसी प्रकार की परियोजना शामिल है।

इन कार्यों का उद्देश्य सिग्नलिंग को अधिक भरोसेमंद बनाना, मैन्युअल काम में कमी लाना और अधिक यातायात वाले मार्गों पर सुरक्षा बढाना है।

ये सभी परियोजनाएं भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं, जिनमें सुरक्षा, विश्वसनीयता और क्षमता वर्धन पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। इनसे कवच प्रणाली स्थापित करने में सहायता मिलेगी, संचार तंत्र मजबूत होगा और प्रमुख मार्गों पर सिग्नलिंग प्रणालियों को समुन्नत बनाया जा सकेगा। इनसे परिचालन दक्षता में सुधार और समूचे नेटवर्क पर सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित होने की संभावना है।

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