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SECI और आंध्र प्रदेश द्वारा 1200 मेगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और 50 मेगावाट हाइब्रिड परियोजना को अंतिम रूप दिये जाने से भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को प्रोत्साहन मिला

भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के अंतर्गत नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने आज नंदयाल में 1200 मेगावाट क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) और 50 मेगावाट क्षमता की हाइब्रिड सौर परियोजना के विकास के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ सरकारी आदेशों (जीओ) का आदान-प्रदान किया।

यह आदान-प्रदान विशाखापत्तनम में आयोजित आंध्र प्रदेश साझेदारी शिखर सम्मेलन 2025 के ऊर्जा सत्र के दौरान हुआ, जिसका आयोजन आंध्र प्रदेश सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा सीआईआई के सहयोग से किया गया था।

परियोजना अनुमोदन और अधिदेश

विद्युत मंत्रालय ने 23 जनवरी 2025 के एक आदेश के माध्यम से, बाजार-आधारित परिचालनों के तहत 1200 मेगावाट क्षमता वाली बीईएसएस परियोजना के लिए एसईसीआई को कार्यान्वयन एजेंसी नामित किया। इसके बाद, एसईसीआई बोर्ड के अध्यक्ष संतोष कुमार सारंगी ने 22 अक्टूबर 2025 को इस परियोजना को मंजूरी दे दी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय दोनों परियोजनाओं की प्रगति और विकास पर करीबी निगरानी रख रहा है।

एसईसीआई पूंजीगत व्यय मोड के तहत परियोजनाओं का विकास करेगी

बीईएसएस और हाइब्रिड सौर परियोजनाएं दोनों ही कैपेक्स मोड के तहत विकसित की जाएंगी, जिसमें एसईसीआई पूर्ण निवेश जिम्मेदारियां उठाएगी।

आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टीपति रवि कुमार ने आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के. विजयानंद और एनआरईडीसीएपी के उपाध्यक्ष एम. कमलाकर बाबू की उपस्थिति में एसईसीआई को औपचारिक रूप से सरकारी आदेश सौंपे। एसईसीआई का प्रतिनिधित्व शिवकुमार वेंकट वेपाकोम्मा और रोहित चौबे ने किया।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा इको-सिस्टम का सुदृढ़ीकरण

सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान आंध्र प्रदेश के नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। एसईसीआई ने भारत के हरित, अधिक लचीले ऊर्जा भविष्य की ओर परिवर्तन में गति लाने के लिए राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ साझेदारी करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ये परियोजनाएं मिलकर स्वच्छ ऊर्जा भंडारण क्षमता में एक महत्वपूर्ण कदम का संकेत देती हैं, जो राज्य के नवीकरणीय इको- सिस्टम को सुदृढ़ करती हैं और भारत के एक अधिक लचीले, भंडारण-सक्षम हरित ग्रिड की ओर परिवर्तन को सक्षम बनाती हैं।

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