भारत

जीआई एंड बियॉन्ड 2.0 शिखर सम्मेलन में भारत के जीआई-टैग प्राप्त हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया गया

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (एचईपीसी) के सहयोग से आयोजित जीआई एंड बियॉन्ड 2.0 शिखर सम्मेलन का आज नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस शिखर सम्मेलन में भारत के समृद्ध जीआई-टैग प्राप्त हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया गया और नीति निर्माताओं, विदेशी खरीदारों, निर्यातकों, औद्योगिक प्रमुखों, जीआई हितधारकों, शिक्षाविदों और बुनकर प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि जीआई पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग को मजबूत किया जा सके और भारत के पारंपरिक उत्पादों के लिए व्यापक बाजार अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके।

विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नीलम शमी राव, सचिव (वस्त्र) , डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हथकरघा), अमृत राज, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), अखिलेश कुमार, महानिदेशक (वस्त्र), प्रो. (डॉ.) उन्नत पी. ​​पंडित, पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क नियंत्रक (सीजीपीडीटीएम), आरओसी, जीआई एवं एसआईसीएलडीआर और कार्तिकेय ढांडा, सचिव (वस्त्र समिति) की उपस्थिति में शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निर्यातक, विदेशी खरीदार, जीआई हितधारक, शिक्षाविद और बुनकर संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

अपने उद्घाटन भाषण में पबित्रा मार्गेरिता ने इस बात पर जोर दिया कि भौगोलिक संकेत (जीआई) केवल कानूनी सुरक्षा ही नहीं बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शिल्प कौशल और पहचान के प्रतीक हैं। उन्होंने जीआई टैग वाले हथकरघा उत्पादों के लिए बाजार के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के महत्व पर बल दिया, साथ ही उनकी प्रामाणिकता और परंपराओं को संरक्षित करने की बात भी कही जो उन्हें अद्वितीय बनाती हैं। उन्होंने भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने और कारीगर एवं बुनकर समुदायों के लिए स्थायी आजीविका का समर्थन करने में जीआई उत्पादों की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया।

शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने लद्दाख नंबू वस्त्र, लद्दाख पश्मीना वस्त्र, हिमाचल गुडमा, हिमाचल लिंगचे, झारखंड बांस शिल्प, झारखंड तुसार रेशम साड़ी और कपड़े, झारखंड के मुंडा आभूषण और बरेली टेराकोटा के लिए नए जीआई प्रमाणपत्र संबंधित जीआई धारकों को प्रदान किए। यह प्रमाणपत्र भारत की अनूठी पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में उनके प्रयासों को मान्यता देते हुए दिए गए।

सभा को संबोधित करते हुए वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने नीतिगत समर्थन, डिजिटल पहलों, बाजार विकास और संस्थागत सहयोग के माध्यम से हथकरघा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल हथकरघा एटलस भारत के जीआई-टैग वाले हथकरघा उत्पादों को अधिक दृश्यता प्रदान करेगा और बुनकरों तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने में सहायक होगा।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने भारत के पारंपरिक बुनाई समुदायों के योगदान और क्लस्टर विकास, डिजाइन सहायता, कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार पहुंच के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए मंत्रालय के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जीआई मान्यता भारत की अनूठी बुनाई परंपराओं को स्थायी महत्व प्रदान करती है, साथ ही बुनकरों के लिए नए अवसर भी सृजित करती है।

शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण डिजिटल हथकरघा एटलस– ‘एक मंच, अनंत बाजार’ का शुभारंभ था। यह एक व्यापक डिजिटल मंच है जिसे भारत के हथकरघा उत्पादों, जिनमें जीआई-टैग वाले उत्पाद भी शामिल हैं, को प्रदर्शित करने और कारीगरों को व्यापक बाजारों से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उद्घाटन सत्र के दौरान, पंजीकृत मालिकों और नव-अधिकृत उपयोगकर्ताओं को जीआई प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (एचईपीसी) के हीरक जयंती लोगो का भी अनावरण किया गया, जो भारत के हथकरघा निर्यात को बढ़ावा देने में परिषद के साठ वर्षों के योगदान का प्रतीक है।

इस शिखर सम्मेलन में देशभर से 100 से अधिक जीआई-पंजीकृत हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, साथ ही भारत की विविध बुनाई परंपराओं को दर्शाने वाले विषयगत प्रदर्शन और कारीगरों और बुनकरों द्वारा लाइव प्रदर्शन भी प्रस्तुत किए गए। प्रदर्शनी ने प्रतिभागियों को भारत के जीआई उत्पादों के शिल्प कौशल, विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव करने का अवसर प्रदान किया।

आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों द्वारा एक विशेष प्रस्तुति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के संभावित अनुप्रयोग पर प्रकाश डाला गया, जिससे जीआई इकोसिस्‍टम को सुदृढ़ किया जा सके। शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में जीआई पंजीकरण और बौद्धिक संपदा अधिकार, घरेलू बाजार में जीआई उत्पादों का प्रचार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जीआई हथकरघा उत्पादों का लाभ उठाने पर विचार-विमर्श किया गया। इन सत्रों में सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, बौद्धिक संपदा संस्थानों, खुदरा ब्रांडों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

जीआई एंड बियॉन्ड 2.0 शिखर सम्मेलन ने संस्थागत सहयोग, नवाचार और बाजार विकास को मजबूत करके भारत के जीआई-टैग वाले हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा करने के लिए वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। नीति निर्माताओं, उद्योग, निर्यातकों, जीआई हितधारकों, शिक्षाविदों और विदेशी खरीदारों को एक साझा मंच पर लाकर, शिखर सम्मेलन से भारत की अनूठी हथकरघा और हस्तशिल्प विरासत की दृश्यता, बाजार पहुंच और वैश्विक मान्यता को और मजबूत करने की उम्मीद है।

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