भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट मिशन के तहत दो उपग्रहों को अलग करने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में यह देश की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिकों को इस सफलता के लिए बधाई दी है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर उन्होंने कहा कि यह सफलता भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रयान-4 और गगनयान सहित भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं के सुचारू संचालन का मार्ग प्रशस्त करेगी।
भारतीय अंतरिक्ष यात्रा में अनडोकिंग का बड़ी अहमियत बताई गई है, दोनों उपग्रहों जब अंतरिक्ष में थे उनका इसरो द्वारा देश में ही अनुसंधान द्वारा विकसित टेक्नोलॉजी की मदद से अलग करना एक अहम योजना है, जिससे आगे काफी मदद मिलेगी स्वयं चालित यानी ऑटोनॉमस टॉकिंग और अनडोकिंग तकनीक की मदद से इसरो अंतरिक्ष में अपने सैटेलाइट्स को किसी अलग यान से जोड़ पाएगा ओर अलग भी कर पाएगा चंद्र ग्रह को उपग्रह भेज कर वहां से सैंपल लेकर वापस आना हो या भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन में उतरना हो तो डॉकिंग ओर अनडोकिंग की आवश्यकता पड़ेगी। यूएसए, रशिसा और चाइना के बाद अब भारत के पास भी यह तकनीक उपलब्ध है।
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