इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने ड्रोन फेडरेशन इंडिया (डीएफआई) के साथ मिलकर आज SwaYaan पहल के तहत ड्रोन एप्लीकेशन और रिसर्च के लिए नेशनल इनोवेशन चैलेंज (NIDAR 2.0, 2026-27) के दूसरे संस्करण की शुरूआत की। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक्स निकेतन में हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया, जिसमें देश भर से छात्र, संकाय, सरकारी प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गजों ने व्यक्तिगत रूप से और ऑनलाइन हिस्सा लिया।
एमईआईटीवाई के सचिव श्री एस. कृष्णन ने NIDAR 2.0 के लिए प्रॉब्लम स्टेटमेंट, पोस्टर और रूलबुक लॉन्च की। इसके बाद मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ श्री अमितेश कुमार सिन्हा ने विशेष संबोधन दिया। मंत्रालय की वैज्ञानिक जी और समूह समन्वयक श्रीमती तुलिका पांडे और डीएफआई के अध्यक्ष श्री स्मित शाह ने भी सभा को संबोधित किया और SwaYaan कौशल निर्माण पहल और NIDAR 2.0 चैलेंज की मुख्य बातों पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में एमईआईटीवाई, नागरिक विमानन, रक्षा और गृह मंत्रालयों, डीजीसीए, सशस्त्र बलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख अकादमिक और उद्योग जगत की हस्तियों ने भी भाग लिया।
इस मौके पर श्री एस. कृष्णन ने कहा, “NIDAR 2.0 हमारे छात्रों को सिर्फ ड्रोन उड़ाने से आगे ले जाकर ड्रोन का दिमाग बनाने की ओर ले जाता है। जब ड्रोन का दिमाग भारत के अपने VEGA प्रोसेसर पर चलता है, तो हम सिर्फ इंजीनियरों को प्रशिक्षण नहीं दे रहे होते हैं, हम एक आत्मनिर्भर ड्रोन इंडस्ट्री की नींव रख रहे होते हैं। VEGA को डिजिटल इंडिया RISC-V (DIR-V) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है, जो विदेशी चिप डिज़ाइन और उनकी लाइसेंसिंग लागत पर देश की निर्भरता को कम करने के लिए एमईआईटीवाई की एक पहल है।”
NIDAR 2025-26 का पहला संस्करण मार्च 2025 में लॉन्च किया गया था। इसमें 22 राज्यों, 4 केंद्र शासित प्रदेशों और 109 शहरों के 3,448 छात्रों ने हिस्सा लिया और आपदा प्रबंधन और सटीक खेती के लिए ऑटोनॉमस ड्रोन सॉल्यूशन बनाए। 93 टीमें ग्रैंड फ़िनाले तक पहुँचीं, जिनमें से 24 टीमों ने कुल 40 लाख रुपये के इनाम जीते।
NIDAR 2.0 इस चुनौती का स्तर और ऊँचा करता है। यह पारंपरिक एयरफ्रेम से हटकर ऑटोनॉमस सिस्टम, स्वदेशी एवियोनिक्स और मुख्य ड्रोन कंपोनेंट्स पर ध्यान केंद्रित करता है। यह चैलेंज दो ट्रैक्स में चलेगा।
ट्रैक 1, ड्रोन इनोवेशन में छात्र टीमों को पूरी तरह से ऑटोनॉमस स्वार्म ड्रोन बनाने का काम दिया गया है, जो बिना किसी बाहरी संचार नेटवर्क के आपदा क्षेत्र में बचे हुए लोगों का पता लगा सकें और मेडिकल सामग्री पहुँचा सकें। यह टीमों को एक ऐसा जीपीएस रहित ड्रोन विकसित करने की चुनौती भी देता है, जो औद्योगिक निरीक्षण के लिए सीमित इनडोर जगहों में नेविगेट कर सके।
ट्रैक 2, कंपोनेंट इनोवेशन में टीमों को स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उपयोग करके VEGA प्रोसेसर पर आधारित स्वदेशी फ़्लाइट कंट्रोलर और ऑटोपायलट डिज़ाइन करने की चुनौती दी गई है। तकनीकी मूल्यांकन के बाद, टॉप 100 टीमों में से प्रत्येक को डेवलपमेंट, टेस्टिंग और इंटीग्रेशन के लिए दो VEGA प्रोसेसर किट मिलेंगी।
VEGA प्रोसेसर, ओपन-स्टैंडर्ड RISC-V आर्किटेक्चर पर आधारित स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसरों की एक श्रृंखला है, जिसे मंत्रालय के माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक) ने डिज़ाइन किया है। NIDAR 2.0, कंपोनेंट इनोवेशन ट्रैक के केंद्र में इस प्रोसेसर को रखकर, छात्रों को भारतीय ड्रोन के कंट्रोल सिस्टम को भारत में बनी चिप्स पर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
इसके बड़े दायरे को देखते हुए, NIDAR 2.0 के लिए इनाम की कुल राशि बढ़ाकर 65 लाख रुपये से ज़्यादा कर दी गई है। जीतने वाली टीमों को कॉर्पोरेट इंटर्नशिप, इनक्यूबेशन सपोर्ट और क्लाउड कंप्यूटिंग क्रेडिट भी मिलेंगे, ताकि वे अपने प्रोटोटाइप को कमर्शियल प्रोडक्ट में बदल सकें। नागरिक और रक्षा संबंधी ड्रोन में ज़्यादातर एक जैसी कोर तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसलिए, NIDAR से मिलने वाले नए विचार आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों के अनुरूप नागरिक और रक्षा क्षेत्र दोनों तरह के इस्तेमाल को मज़बूत कर सकते हैं।
SwaYaan के बारे में
अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (ड्रोन और उससे जुड़ी तकनीक) में ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट के लिए क्षमता निर्माण
SwaYaan पहल को मंत्रालय ने जुलाई 2022 में मंज़ूरी दी थी। इसके तहत पाँच सालों में लगभग 89.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह पहल भारत के ड्रोन क्षेत्र के लिए ज़रूरी कुशल कार्यबल तैयार करती है। यह 30 प्रमुख संस्थानों (जैसे आईआईएससी, आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, सी-डैक और एनआईईएलआईटी) के हब-एंड-स्पोक मॉडल के ज़रिए पाँच वर्क थीम पर काम करती है: एयरोमैकेनिक्स, ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक्स, जीएनसी एल्गोरिदम और सिमुलेशन, ड्रोन एप्लीकेशन और संबंधित यूएएस तकनीक। इस परियोजना के तहत अब तक 51,000 से ज़्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसने ड्रोन तकनीक में एम टेक और माइनर डिग्री प्रोग्राम, रेट्रोफिटिंग इलेक्टिव, ऑनलाइन कोर्स, रिसर्च पेपर और पेटेंट में भी मदद की है। NIDAR नवाचार से जुड़ा इसका मुख्य मंच है। ज़्यादा जानकारी के लिए https://swayaan.meity.gov.in पर जाएँ।





