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कोयला मंत्रालय ने फिक्की के सहयोग से कोयला गैसीकरण पर रोड शो आयोजित किया

कोयला मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में फिक्की (FICCI) के सहयोग से “कोयला गैसीकरण– सतही एवं भूमिगत तकनीक” पर दूसरा रोड शो सफलतापूर्वक आयोजित किया। मुंबई में आयोजित पहले संस्करण की सफलता के बाद इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में स्वच्छ और टिकाऊ कोयला उपयोग तकनीकों को बढ़ावा देना था। इस मौके पर कोयला मंत्रालय की अपर सचिव रुपिंदर बरार, और मंत्रालय के अपर सनोज कुमार झा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य हितधारक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कोयला गैसीकरण की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात घटाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भर भारत को समर्थन देने में भूमिका पर चर्चा हुई।

अपने मुख्य भाषण में कोयला मंत्रालय की अपर सचिव एवं नामित प्राधिकारी रुपिंदर बरार ने भारत की ऊर्जा संरचना में कोयले की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत का कोयला उत्पादन 1 अरब टन से ऊपर पहुंच चुका है और यह देश के ऊर्जा मिश्रण का आधार है, जो बिजली क्षेत्र को शक्ति देता है और उद्योगों की वृद्धि में सहायक है।

उन्होंने कहा कि सतही और भूमिगत दोनों स्तरों पर उन्नत व स्वच्छ कोयला गैसीकरण तकनीकों का अपनाना न केवल पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए ज़रूरी है, बल्कि आयात घटाने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत करने के लिए भी अहम है। ये तकनीकें नए उद्योग, वैल्यू चेन और निवेश को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि में बड़ा योगदान कर सकती हैं। भारत के व्यापक विकास पथ पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से देश की दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा में तेज़ी आएगी, साथ ही एक टिकाऊ और आत्मनिर्भर भारत भी सुनिश्चित होगा।

रूपिंदर बरार ने आगे कहा कि कोयला भारत की लगभग 70% बिजली उत्पादन ज़रूरतों को पूरा करता है और कोयला गैसीकरण बढ़ती ऊर्जा मांगों को जिम्मेदारी से और दक्षता के साथ पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सरकार और उद्योग के बीच निरंतर सहयोग का आह्वान किया।

कोयला मंत्रालय के अपर सचिव, सनोज कुमार झा ने अपने संबोधन में इस पर बार जोर दिया कि भारत का कोयला क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है और औद्योगिक वृद्धि का अहम स्तंभ है। उन्होंने सरकार की कोयला गैसीकरण और भूमिगत कोयला गैसीकरणा को बढ़ावा देने वाली पहलों पर प्रकाश डाला और निजी क्षेत्र की भागीदारी को तेज़ तकनीकी अपनाने के लिए अनिवार्य बताया। सनोज कुमार झा ने ज़ोर देकर कहा कि कोयला गैसीकरण में कोयले के आयात को काफ़ी कम करने, घरेलू कोयले की माँग को पूरा करने और टिकाऊ, आत्मनिर्भर आर्थिक विकास में योगदान देने की क्षमता है।

सनोज कुमार झा ने रेखांकित किया कि भारत का कोयला क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। उन्होंने कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि इन प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कोयला गैसीकरण मिशन (2020) का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन उत्पादन करना है। कोयला मंत्रालय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, निवेश को बढ़ावा देने और सतत ऊर्जा में वैश्विक अग्रणी के रूप में भारत की स्थिति को मज़बूत करने के लिए इन पहलों को आगे बढ़ा रहा है।

फिक्की के पूर्व अध्यक्ष और इंडियन मेटल्स एंड फेरो अलॉयज़ लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, शुभ्रकांत पांडा ने अपने संबोधन में , प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर आयात निर्भरता को कम करने में कोयला गैसीकरण के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण उर्वरकों और स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को सक्षम बनाकर नए औद्योगिक क्षेत्र भी खोलता है, जिससे सतत विकास और बढ़ी हुई ऊर्जा सुरक्षा में योगदान मिलता है।

इस रोड शो के दौरान, प्रतिभागियों को कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकियों और संबंधित बोली प्रक्रियाओं की व्यापक समझ प्रदान करने के लिए विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के उपाध्यक्ष शुभम गोयल ने सतह कोयला गैसीकरण और वाणिज्यिक बोली प्रक्रिया पर विस्तार से बताया, जबकि कोयला मंत्रालय के निदेशक अजितेश कुमार और बीरेंद्र कुमार ठाकुर ने भूमिगत कोयला गैसीकरण का गहन अवलोकन प्रस्तुत किया। इस आयोजन में एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र भी शामिल था, जहां प्रतिभागियों ने मंत्रालय के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सीधे निवेश रणनीतियों, नियामक अनुपालन, परियोजना वित्तपोषण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों पर चर्चा की।

इस रोड शो ने कोयला मंत्रालय की पारदर्शिता, हितधारक सहभागिता और सहयोगात्मक वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। निवेश अवसरों, तकनीकी प्रगति और सरकारी पहलों को प्रदर्शित करके कार्यक्रम ने ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक वृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को मज़बूत करने की दिशा में भारत की पहल को रेखांकित किया।

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