दुनिया भर में प्रति वर्ष 1.53 लाख से अधिक मौतें भीषण गर्मी या लू के कारण होती हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 20 फीसदी मौतें भारत में होती हैं। एक अध्ययन से यह जानकारी मिली। पिछले 30 वर्षों से अधिक के आंकड़ों के आधार पर यह अध्ययन किया गया। भारत के बाद चीन और रूस का स्थान है, जिनमें से प्रत्येक में क्रमशः लगभग 14 फीसदी और आठ फीसदी मौतें भीषण गर्मी से जुड़ी होती हैं।
मोनाश विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पाया गया कि लू से जुड़ी मौतें गर्मी से संबंधित सभी मौतों का लगभग एक तिहाई और वैश्विक स्तर पर कुल मौतों का एक प्रतिशत है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि हर साल गर्मियों में होने वाली कुल 1.53 लाख अतिरिक्त मौतों में से लगभग आधी एशिया में और 30 प्रतिशत से अधिक यूरोप में होती हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कर्नाटक के मांड्या जिले के श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि में श्री…
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को फ्रांस को भारत के सबसे भरोसेमंद और मित्रवत…
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) ने अपने इनक्यूबेशन सेंटर आईसीएआईएनई के माध्यम से नवाचार और…
भारत के वित्तीय इको-सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम…
हिंद महासागर पोत (आईओएस) सागर 14 अप्रैल 2026 को मालदीव के माले से छह दिवसीय…
केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने आज नई दिल्ली में अर्बन चैलेंज…