भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीम राव आंबेडकर की 136वीं जयंती पर राष्ट्र आज उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। इस अवसर पर देश भर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। नई दिल्ली के संसद भवन परिसर में आज सुबह डॉ. भीम राव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश में जन्मे डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर ने अपना पूरा जीवन सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में समर्पित कर दिया। उन्होंने महिलाओं, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार काम किया। उनकी सोच और प्रयासों ने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की नींव रखी जो भारत के संविधान में साफ दिखाई देती है, साथ ही संविधान के निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
डॉक्टर अंबेडकर का योगदान आर्थिक नीतियों बुनियादी ढांचे और संवैधानिक कानून सहित कई क्षेत्रों में रहा है। इसी वजह से उन्हें एक महान राष्ट्र निर्माता के रूप में भी जाना जाता है, जो एक न्याय संगत और सामान भारत बनाने के लिए समर्पित थे। उन्हें उनके योगदान के लिए वर्ष 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। आज का दिन उनके महान कार्यों खासकर सामाजिक न्याय समानता और भारतीय संविधान के निर्माण में उनके योगदान को याद करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में बाबासाहेब अम्बेडकर का अद्वितीय योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. अम्बेडकर का जीवन और उनके आदर्श नागरिकों को एक न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील समाज बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने कर्नाटक…
भारत और इज़राइल ने प्रस्तावित भारत-इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता का दूसरा…
मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान, गुजरात और मध्य महाराष्ट्र में आज मूसलाधार बारिश का रेड…
सर्वोच्च न्यायालय ने आज केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को नीट-यूजी पेपर लीक मामले…
भारत ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कथित दमन के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया…