राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसके अनुसार हरियाणा के हिसार और रोहतक के अस्पतालों में लगभग 24 घंटे तक वेंटिलेटर सपोर्ट न मिलने के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, नवजात के पिता ने अपने बच्चे के लिए वेंटिलेटर सपोर्ट जुटाने के लिए हिसार और रोहतक जिलों के एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटे, लेकिन वे सफल नहीं सके, जिसके परिणामस्वरूप शिशु की मृत्यु हो गई।
आयोग ने टिप्पणी की कि समाचार रिपोर्टों की सामग्री, यदि सच है, तो ये मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर मुद्दे उठाती है। इसलिए आयोग ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
3 जुलाई 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस शिशु का जन्म 1 जुलाई 2026 को हिसार के सिविल अस्पताल में सीज़ेरियन ऑपरेशन के जरिये हुआ था और उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता थी। जबकि उसकी मां सिविल अस्पताल में भर्ती रही, डॉक्टरों ने शुरूआत में नवजात शिशु को हिसार जिले के अग्रोहा स्थित मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया। हालांकि, जब सिविल अस्पताल ने कथित तौर पर इस बात की पुष्टि की कि अग्रोहा में भी कोई वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है, बच्चे को रोहतक के पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया। पीजीआईएमएस में भी वेंटिलेटर न मिलने पर बच्चे को वापस हिसार लाया गया और एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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