संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास-संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। राज्यसभा से सोमवार को मंजूरी मिलने के बाद लोकसभा ने भी आज इस विधेयक को पारित किया।
यह विधेयक भुगतान में होने वाली देरी को दूर करने और विवादों के समाधान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए लाया गया है। इसके अनुसार हर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से खरीदी गई वस्तुओं या सेवाओं के सभी बिलों का भुगतान, ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से करना होगा। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि विवाद की स्थिति में मध्यस्थता से समाधान नहीं निकलता है, तो 30 दिन के भीतर मामले के सुलह के लिये आरबीट्रेशन के लिए भेजना होगा। इसके अलावा, पक्षों की दलीलें पूरी होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर निर्णय देने का प्रावधान है। यदि कोई मामला छह महीने से अधिक समय से लंबित है, तो आपूर्तिकर्ता को, तय की गई राशि का कम से कम, 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके अलावा विधेयक में दंड का भी प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण के लिए जानबूझकर गलत जानकारी देता है, तो पहली बार उसे चेतावनी दी जाएगी। इसके बाद दोबारा गलती करने पर एक हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इससे पहले, सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन संबंधी विधेयक सदन में पेश किया। विधेयक के अनुसार सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को एमएसएमई से खरीदे गए सामान और सेवाओं के सभी बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से करना होगा।
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