उच्चतम न्यायालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामले में कार्रवाई न करने के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को को फटकार लगायी। प्राधिकरण द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण शीर्ष न्यायालय का 10 अप्रैल का आदेश मिलने के बाद ही कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए सक्रिय हुआ। पीठ ने कहा, ‘‘अगर आप सहानुभूति और अनुकंपा चाहते हैं तो अदालत के प्रति ईमानदार रहें।’’ न्यायालय ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता यह है कि क्या लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की।
गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए हैं।…
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग-एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के निकट दत्तानगर…
भारत और मंगोलिया के रक्षा मंत्रालयों के संयुक्त कार्य समूह की आज उलानबातार में आयोजित…
भारत की क्वांटम प्रौद्योगिकी और सुरक्षित संचार क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण…
भारतीय प्रेस परिषद ने विरोध और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए दिशा-निर्देश…