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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्‍ज़ के साथ शिष्‍टमंडल स्तर की वार्ता की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और यह 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। गुजरात के गांधीनगर में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्‍ज़ के साथ संयुक्त संवाददाता सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में दो हजार से अधिक जर्मनी कंपनियां लंबे समय से कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।

रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। रक्षा व्यापार से जुड़ी प्राथमिकताओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मर्त्‍ज का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप उस पर भी काम करेंगे, जिससे co-development और co-production के नए अवसर खुलेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष दोनों देश राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष मना रहे हैं। चांसलर मर्त्‍ज की ये यात्रा एक विशेष समय पर हो रही है। पिछले वर्ष हमने अपने रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए और इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी मना रहे हैं। ये milestones केवल समय की उपलब्धियाँ नहीं हैं, ये हमारी साझा महत्वाकांक्षाओं, परस्पर विश्वास और निरंतर सशक्त होते सहयोग के प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए जर्मनी के चांसलर मर्त्‍ज़ का आभार व्‍यक्‍त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग लगतार मजबूत हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी मानवता के लिए भारत-जर्मनी संबंध बहुत महत्‍वपूर्ण हैं। हम एकमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत और जर्मनी इसके विरुद्ध एकजुट होकर पूरी दृढ़ता से लड़ाई जारी रखेंगे। भारत और जर्मनी सहमत हैं कि Global challenges से निपटने के लिए Global institutions में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। UN Security Council में सुधार के लिए G4 के माध्यम से हमारा संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं।

फ्रेडरिक मर्त्‍ज़ ने कहा कि दोनों देश आपसी संबंधों को उच्‍चतम स्तर पर ले जाना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री और जर्मनी के चांसलर के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कई पहलों की घोषणा की है। इससे द्विपक्षीय संबंधों में एक नये अध्याय की शुरूआत हुई है। रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने सह-विकास और सह-उत्पादन पर केंद्रित एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध दो राष्ट्र हैं। जर्मनी के चांसलर मर्त्‍ज़ ने कहा कि नौसेना और वायुसेना के संयुक्त अभ्यासों में वृद्धि सहित गहरे सैन्य संबंध, भारत को अपनी रक्षा निर्भरताओं में विविधता लाने में मदद करेंगे।

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