देश में रेल अवसंरचना को निरंतर बेहतर बनाने और बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 86 जिलों में 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित 103 पुनर्विकसित अमृत स्टेशनों का उद्घाटन किया। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 1,300 से अधिक स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकसित किया जा रहा है, जिन्हें क्षेत्रीय वास्तुकला को प्रतिबिंबित करने और यात्री सुविधाओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। करणी माता मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सेवा करने वाला देशनोक रेलवे स्टेशन मंदिर वास्तुकला और मेहराब एवं स्तंभ विषयवस्तु से प्रेरित है। तेलंगाना में बेगमपेट रेलवे स्टेशन काकतीय साम्राज्य की वास्तुकला से प्रेरित है। बिहार में थावे स्टेशन में 52 शक्तिपीठों में से एक माँ थावेवाली का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न भित्ति चित्र और कलाकृतियां शामिल हैं और यहां मधुबनी पेंटिंग को दर्शाया गया है। गुजरात में डाकोर स्टेशन रणछोड़राय जी महाराज से प्रेरित है। भारत भर में पुनर्विकसित अमृत स्टेशनों में आधुनिक अवसंरचना को सांस्कृतिक विरासत, दिव्यांगजनों के लिए यात्री-केंद्रित सुविधाओं और यात्रा के अनुभव को बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक कार्य प्रणालियों के साथ एकीकृत किया गया है।
भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के शत प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर अग्रसर है, जिससे रेलवे संचालन अधिक कुशल और पर्यावरण अनुकूल बन रहा है। इसी क्रम में, प्रधानमंत्री ने चुरू-सादुलपुर रेल लाइन (58 किमी) की आधारशिला रखी और सूरतगढ़-फलोदी (336 किमी); फुलेरा-डेगाना (109 किमी); उदयपुर-हिम्मतनगर (210 किमी); फलोदी-जैसलमेर (157 किमी) और समदड़ी-बाड़मेर (129 किमी) रेल लाइन विद्युतीकरण को राष्ट्र को समर्पित किया।
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