भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संकट की उभरती स्थिति के मद्देनज़र तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने हाल के पश्चिम एशिया घटनाक्रम और भारत पर उसके संभावित प्रभाव के संदर्भ में तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उप राज्यपालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक की अध्यक्षता की।

प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए अहम सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि ये सुझाव उभरती स्थिति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भावी चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारियों और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास इस तरह के वैश्विक व्यवधान से निपटने का पहले का अनुभव है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए सामूहिक प्रयासों को याद किया, जब केंद्र और राज्यों ने “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर आपूर्ति शृंखलाओं, व्यापार और दैनिक जीवन पर प्रभाव को कम करने के लिए काम किया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यही सहयोग और समन्वय की भावना वर्तमान परिस्थितियों से निपटने में भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हालात लगातार बदल रहे है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह सक्रिय है, जो दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा कर रहा है और समय पर निर्णय ले रहा है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग एवं आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूती प्रदान करना है।

राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्णयों का प्रभावी कार्यान्वयन राज्य स्तर पर ही होता है। उन्होंने त्वरित और सुव्यवस्थित प्रतिक्रिया के लिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय, समय पर जानकारी साझा करने और संयुक्त निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से आपूर्ति शृंखलाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने तथा जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ कड़े कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने व्यवधानों को रोकने के लिए राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय करने और प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से उर्वरक के भंडारण और वितरण की निगरानी सहित कृषि क्षेत्र में पूर्वनियोजन की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि आगामी खरीफ मौसम में किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

प्रधानमंत्री ने गलत सूचना के प्रसार और अफवाहों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि समय पर सटीक और विश्वसनीय जानकारी का प्रसार भय फैलने से रोकने के लिए आवश्यक है। उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी और नकली एजेंटों के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने नौवहन, आवश्यक आपूर्तियों और समुद्री संचालन से जुड़ी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सीमावर्ती और तटीय राज्यों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया

उन्होंने जनता का विश्वास बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के संबंध में आश्वासन नागरिकों में अनावश्यक भय फैलने से रोकने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन राज्यों के नागरिक पश्चिम एशिया में हैं, वे प्रभावित परिवारों की सहायता और समय पर जानकारी के प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन सक्रिय करें, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें और जिला स्तर पर सहायता प्रणाली स्थापित करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक और आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में हाल के वर्षों में लिए किए गए प्रयास वर्तमान परिस्थितियों में लाभकारी साबित हो रहे हैं। उन्होंने उद्योग और एमएसएमई के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि उनकी चिंताओं का समाधान हो और उत्पादन व रोजगार में स्थिरता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सभी स्तरों पर मजबूत समन्वय तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिनमें मुख्य सचिवों के स्तर पर नियमित समीक्षा और जिला स्तर पर निरंतर निगरानी शामिल है, ताकि बदलती परिस्थितियों का त्वरित और प्रभावी जवाब दिया जा सके।

प्रधानमंत्री ने तत्काल प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक तैयारियों पर समान रूप से ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों से जैव ईंधन, सौर ऊर्जा, गोबरधन पहल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने और पाइप द्वारा प्राकृतिक गैस के कनेक्शनों का विस्तार करने में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों के सक्रिय सहयोग के साथ घरेलू स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की खोज बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने दोहराया कि इस चुनौती से निपटना साझा जिम्मेदारी है और विश्वास व्यक्त किया कि “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर काम करते हुए देश इस स्थिति से सफलतापूर्वक निपट लेगा।

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार इस संकट से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है और एलपीजी की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और पेट्रोल व डीज़ल पर उत्पाद शुल्क कम करने जैसे सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने स्थिति से निपटने के लिए सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र की ओर से सामूहिक कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुति दी और राज्यों को स्थिति से निपटने के लिए कदम और सुझाव बताए।

मुख्यमंत्रियों ने स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने इस संकट के दौरान भारतीय नागरिकों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए कूटनीतिक प्रयासों की भी प्रशंसा की।

सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि स्थिति स्थिर बनी हुई है, पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है, और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी तंत्र मौजूद हैं। उन्होंने ईंधन पर उत्पाद शुल्क घटाने के निर्णय का व्यापक रूप से स्वागत करते हुए कहा कि इससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नागरिकों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी। मुख्यमंत्रियों ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को संकट से पहले के 50% स्‍तर से बढ़ाकर 70% करने के निर्णय का भी स्वागत किया। उन्होंने उभरती स्थिति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने और नागरिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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