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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्मयोगी साधना सप्ताह को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस के अवसर पर कर्मयोगी साधना सप्ताह को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कर्मयोगी साधना सप्ताह को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया और सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री ने तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश के साथ सार्वजनिक सेवाओं के तालमेल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्थाओं के बीच तेजी से प्रगति कर रहा है और उसे अपनी शासन प्रणाली को निरंतर अपडेट करते रहना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कर्मयोगी साधना सप्ताह, यह सुनिश्चित करने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण कड़ी है कि हमारी सार्वजनिक सेवा 21वीं सदी में प्रासंगिक और उत्तरदायी बनी रहे।”

प्रधानमंत्री ने आज के शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत पर विस्तार से बताते हुए कहा कि प्रशासन का मूल मंत्र “नागरिक देवो भव” है, जिसका अर्थ है नागरिक को सर्वोपरि मानना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोक सेवा को अधिक सक्षम और नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने के लिए पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “शासन को सही मायने में नागरिक-केंद्रित बनाकर उसे एक नई पहचान दी जा रही है।”

प्रधानमंत्री ने क्षमता निर्माण आयोग की स्थापना पर विचार करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से अनेक संस्थाएं विभिन्न उद्देश्यों के साथ कार्य कर रही थीं, फिर भी प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की क्षमता बढ़ाने के लिए एक समर्पित निकाय की स्पष्ट आवश्यकता थी। उन्होंने कहा, “इसी सोच ने क्षमता निर्माण आयोग को जन्म दिया, जिसका उद्देश्य व्यवस्था में प्रत्येक कर्मयोगी को सशक्त बनाना है।” सीबीसी को उसके स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए और आईजीओटी मिशन कर्मयोगी की सफल भूमिका को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से आधुनिक, सक्षम, समर्पित और संवेदनशील कर्मयोगियों की एक टीम का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को विकसित भारत की व्यापक परिकल्पना से जोड़ते हुए सेवा तीर्थ के उद्घाटन के अवसर पर दिए गए अपने हाल के भाषण का उल्लेख किया और तीव्र आर्थिक विकास, आधुनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी को अपनाने और कुशल कार्यबल की प्रचुरता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सार्वजनिक संस्थानों और लोक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज का भारत आकांक्षी है, प्रत्येक नागरिक के सपने और लक्ष्य हैं और हम सभी का यह दायित्व है कि हम उन्हें पूरा करने के लिए अधिकतम सहयोग प्रदान करें।”

प्रधानमंत्री ने नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन व्यवस्था को मानदंड बनाना आवश्यक बताते हुए लोक सेवकों से प्रतिदिन कुछ नया सीखने और कर्मयोगी की सच्ची भावना को अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारी शासन व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में दिन-प्रतिदिन सुधार हो, यही हमारा सच्चा मानदंड है।”

प्रशासनिक संस्कृति में मूलभूत बदलाव का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में ‘अधिकारी’ होने पर अत्यधिक जोर दिया जाता था, जबकि आज देश का पूरा ध्यान कर्तव्यनिष्ठा पर केंद्रित है। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान स्वयं कर्तव्यों के निर्वाह के माध्यम से अधिकार प्रदान करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “प्रत्येक निर्णय लेने से पहले, जब आप अपने कर्तव्य की मांग पर विचार करते हैं, तो आपके निर्णयों का प्रभाव स्वतः ही कई गुना बढ़ जाता है।”

प्रधानमंत्री ने लोक सेवकों से अपने वर्तमान कार्य को भविष्य के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने का आग्रह करते हुए उनसे निरंतर इस बात पर विचार करने को कहा कि उनके व्यक्तिगत निर्णय लाखों लोगों के जीवन को कैसे बदल सकते हैं और व्यक्तिगत परिवर्तन संस्थागत परिवर्तन का मार्ग कैसे प्रशस्त कर सकता है। अपने व्यक्तिगत अनुभव से उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे परिवर्तनकारी कार्यों के लिए अपार ऊर्जा की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, “यह ऊर्जा केवल और केवल निस्वार्थ सेवा की भावना से ही प्राप्त हो सकती है।”

प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पिछले ग्यारह वर्षों में शासन, सेवा वितरण और अर्थव्यवस्था सहित सरकारी कामकाज में प्रौद्योगिकी के गहन एकीकरण की ओर इंगित किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन से ये परिवर्तन और भी तेजी से आगे बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एक बेहतर प्रशासक, एक बेहतर लोक सेवक वही होगा जिसे प्रौद्योगिकी और डेटा की अच्छी समझ हो; यही निर्णय लेने का आधार बनेगा।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि साधना सप्ताह के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता में क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने भारत की संघीय संरचना की ओर ध्यान दिलाते हुए इस बात पर बल दिया कि देश की सफलता उसके सभी राज्यों की सामूहिक सफलता है। उन्होंने कहा कि अगड़े राज्य, पिछड़े राज्य, बीमारू राज्य जैसी दशकों पुरानी श्रेणियां समाप्त की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच की खाई को एकसमान प्रयास से पाटना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमें संवादहीनता को खत्म कर बेहतर समन्वय, साझा समझ और समग्र सरकारी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा, तभी हर मिशन सफल होगा।”

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के समापन में लोक सेवकों को याद दिलाया कि आम नागरिक के लिए स्थानीय सरकारी कार्यालय ही पूरी सरकार का चेहरा होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों की कार्यशैली और व्यवहार सीधे तौर पर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम जो भी करें, जिस भी स्तर पर करें, हमें उस विश्वास की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारे लोकतंत्र की नींव है।” उन्होंने क्षमता निर्माण आयोग को एक बार फिर बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि कर्मयोगी साधना सप्ताह भारत के विकसित भारत बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगा।

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