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भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते के हस्ताक्षर को आज चार वर्ष पूरे

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते के हस्ताक्षर को आज चार वर्ष पूरे हो गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। 2 अप्रैल 2022 को हस्ताक्षर किए जाने के बाद से, इसने व्यापार बढ़ाने, उद्योग संबंधों को सुदृढ़ करने और व्यवसाय, उद्यमिता व रोजगार के नए अवसर सृजित करने में अहम योगदान दिया है।

पिछले चार वर्षों में, इस समझौते ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूती प्रदान की है जिससे दोनों पक्षों को बेहतर बाजार पहुंच और व्यापार बाधाओं में कमी का लाभ मिला है। ऑस्ट्रेलिया को भारत से होने वाला निर्यात दोगुने से ज्यादा बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में जहां यह 4 अरब अमेरिकी डॉलर था, वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर यह 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। 2024-25 के दौरान, कुल द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाले निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में, भारत का ऑस्ट्रेलिया के साथ कुल व्यापार 19.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता के तहत, भारत ने अपनी 70.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान की, जो व्यापार मूल्य के 90.6 प्रतिशत को कवर करती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने अपनी 100 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान की, जो भारत से आयात के 100 प्रतिशत के बराबर है। इनमें से, 98.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनें लागू होते ही शुल्क-मुक्त हो गईं, जबकि शेष 1.7 प्रतिशत (113 टैरिफ लाइनें) को पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है। 1 जनवरी 2026 से सभी भारतीय निर्यात ऑस्ट्रेलिया में शून्य-शुल्क बाजार पहुंच के लिए पात्र होंगे।

ईसीटीए के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में लाभों का विस्तार व्यापक रूप से हो चुका है और इसके फलस्वरूप वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और कृषि उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। आयात के संदर्भ में, यह समझौता भारत के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक कच्चे माल, जैसे धातु, कच्चा कपास, रसायन, उर्वरक और दालों की उपलब्धता को सरल और सुलभ बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस व्यापार संरचना ने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती देने के साथ-साथ घरेलू मूल्यवर्धन को भी बढ़ावा दिया है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 24 सितंबर 2025 को जैविक उत्पादों पर पारस्परिक मान्यता समझौते (एमआरए) पर हस्ताक्षर के साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को एक महत्वपूर्ण ऊंचाई मिली। यह समझौता दोनों देशों की प्रमाणन प्रणालियों को मान्यता देकर जैविक उत्पादों के निर्बाध व्यापार को सुगम बनाता है, जिससे निर्यातकों के लिए दोहराव, लागत और समय की बचत होती है। इस कदम से जैविक क्षेत्र में सहयोग मजबूत हुआ है और जैविक व्यापार नियमों में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ा है।

यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं को ठोस लाभ प्राप्त हो रहे हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता के चार साल पूरे होने के अवसर पर दोनों पक्षों ने व्यापार विस्तार, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, निवेश साझेदारी को बढ़ावा देने और द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

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