आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए मंगलवार को परियोजना निगरानी समूह (पीएमजी) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समन्वित प्रयासों के माध्यम से महत्वपूर्ण अंतर-मंत्रालयी और अंतर-सरकारी बाधाओं को हल करने पर जोर दिया गया। दोनों राज्यों में परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाना इसका उद्देश्य था।
बैठक के दौरान 9 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से संबंधित कुल 18 महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई, जिनका सामूहिक मूल्य 4,904 करोड़ रुपये से अधिक है।
बैठक में जिन प्रमुख परियोजनाओं के बारे में चर्चा की गई उनमें इरुगुर (तमिलनाडु) से देवंगोंथी (कर्नाटक) तक की बहु-उत्पाद पाइपलाइन परियोजना शामिल थी। इसमें 1,732 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। यह पाइपलाइन तमिलनाडु के कई जिलों- कोयंबटूर, धर्मपुरी, इरोड, कृष्णगिरी, नमक्कल, सलेम और तिरुपुर- तक फैली हुई है और आगे कर्नाटक के कोलार और बेंगलुरु ग्रामीण तक फैली हुई है। इस परियोजना को तमिलनाडु में भूमि अधिग्रहण संबंधी तीन प्रमुख चिंताओं और वन संबंधी मंजूरी के मुद्दे का सामना करना पड़ा। समय पर परियोजनाओं की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए समाधान के तौर पर ये मुद्दे उठाए गए थे।
राष्ट्रीय महत्व की एक अन्य परियोजना की समीक्षा की गई, जिसमें रिलायंस जियो द्वारा 5जी/4जी नेटवर्क के विस्तार की पहल शामिल थी। सियाचिन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों सहित दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में उन्नत डिजिटल कनेक्टिविटी लाने के लिए डिजाइन की गई इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा 4जी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी है। बैठक में संबंधित राज्य सरकारों के साथ समन्वय करके लंबित वन और वन्यजीव संबंधी मंजूरी के मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक की अध्यक्षता उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो ने की और इसमें केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों और परियोजना प्रस्तावकों ने भाग लिया।
प्रवीण महतो ने समय पर परियोजना निगरानी और निष्पादन के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने परियोजना समर्थकों से कार्यान्वयन के मुद्दों को उठाने और हल करने के लिए पीएमजी पोर्टल (https://pmg.dpiit.gov.in/) का सक्रियतापूर्वक लाभ उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने दोहराते हुए कहा कि केन्द्रीय मंत्रालयों, राज्य प्राधिकरणों और निजी हितधारकों के बीच सहयोगात्मक प्रयास कुशल, समयबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह विकसित और डिजिटल रूप से सशक्त भारत के विजन में योगदान देता है।
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