आज संविधान हत्या दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की याद दिलाता है, जब देश में संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्य गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। यह दिन उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर भी है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान दमन, उत्पीड़न और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
आज ही के दिन वर्ष 1975 में तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत ‘आंतरिक अशांति’ से उत्पन्न खतरों का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। आपातकाल लागू होने के बाद कार्यपालिका को व्यापक अधिकार प्राप्त हो गए और राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण अधिक मजबूत हो गया। अनुच्छेद 358 के तहत, अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त अधिकारों-जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने और देश में स्वतंत्र रूप से आवागमन करने का अधिकार शामिल था-पर प्रतिबंध लगा दिया गया। नागरिकों को इन अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध न्यायालय की शरण लेने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया। समाचार पत्रों पर पूर्व सेंसरशिप लागू कर दी गई और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए स्थापित वैधानिक संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी समाप्त कर दिया गया। आपातकाल लागू किए जाने के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संस्कृति मंत्रालय आज नई दिल्ली में वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों के समापन समारोह का आयोजन कर रहा है। इस अवसर पर ‘संविधान हत्या दिवस’ तथा ‘लॉग लिव डेमोक्रेसी प्रदर्शनी के साथ-साथ ‘संविधान हत्या दिवस’ विषय पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।
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