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खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने वर्चुअल माध्यम से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की छह परियोजनाओं की आधारशिला रखी

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज वर्चुअल माध्यम से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की छह प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी और दो एथलीट सहायता सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें कुल 120 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

ये पहल भारत के खेल इको-सिस्टम को मजबूत करने और देश भर में विश्व स्तरीय, एथलीट-केंद्रित इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

खेलो इंडिया योजना के तहत जिन छह परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है, उन्हें कुल 82 करोड़ रुपये की लागत से कार्यान्वित किया जाएगा और इसमें भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) से अतिरिक्त सहायता भी मिलेगी।

ये परियोजनाएं भौगोलिक रूप से पूरे देश में फैली हुई हैं, जिनमें उत्तर-पूर्वी और पूर्वी क्षेत्र भी शामिल हैं, जिससे संतुलित और समावेशी खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास सुनिश्चित होता है।

इनमें बेंगलुरु में सिंथेटिक हॉकी टर्फ का उन्नयन, पटियाला में एक बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण, भोपाल, गुवाहाटी और जलपाईगुड़ी में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बिछाना और भोपाल में एक बहुउद्देशीय जूडो हॉल का निर्माण शामिल है।

आधारशिला रखने के अलावा, डॉ. मांडविया ने पटियाला स्थित एनएस एनआईएस में 38 करोड़ रुपये के कुल निवेश से निर्मित दो पूर्ण हो चुकी एथलीट सहायता सुविधाओं का उद्घाटन किया।

इनमें एथलीटों के पोषण संबंधी सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक केंद्रीकृत रसोईघर और फूड कोर्ट-सह-डाइनिंग हॉल और एक अत्याधुनिक एकीकृत खेल विज्ञान केंद्र और कंडीशनिंग हॉल शामिल हैं, जो उत्कृष्ट एथलीटों के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण सहायता, प्रदर्शन विश्लेषण, पुनर्वास और रिकवरी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा।

सभी हितधारकों के प्रयासों की सराहना करते हुए और परिसंपत्ति प्रबंधन में एसएआई की जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “देश भर में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कई परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, लेकिन एसएआई के अंतर्गत आने वाली सुविधाएं सीधे तौर पर हमारी जिम्मेदारी हैं। इन परिसंपत्तियों का उचित रखरखाव, मनोनुकूल इस्तेमाल और जहां संभव हो, व्यावसायिक लाभ सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि सार्वजनिक निवेश से दीर्घकालिक मूल्य का सृजन जारी रहे।”

जवाबदेही और समय पर काम पूरा करने पर जोर देते हुए, डॉ. मांडविया ने यह भी बताया कि इन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निरंतर निगरानी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एसएआई स्तर पर मासिक समीक्षा की जाएगी, जबकि त्रैमासिक समीक्षा उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और निर्मित इंफ्रास्ट्रक्चर का एथलीटों के लाभ के लिए सर्वोत्तम उपयोग किया जाए।

खेल क्षेत्र में व्यापक नीतिगत ढांचे का जिक्र करते हुए, डॉ. मांडविया ने याद दिलाया कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने खेलो इंडिया मिशन की घोषणा की है, जिसमें भारत के खेल इको-सिस्टम को मजबूत करने के लिए कार्यान्वयन के प्रमुख पहलुओं की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना भी शामिल है।

डॉ. मांडविया ने कहा, “हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को साकार करने के लिए सामूहिक रूप से काम करना होगा, जिसके तहत भारत को 2036 तक शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में और देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर शीर्ष पांच राष्ट्रों में स्थान दिलाना है।”

उन्होंने यह भी बताया कि खेल सामग्री निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे न केवल घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी बल्कि आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेल इको-सिस्टम के विकास को भी समर्थन मिलेगा।

देश में खेलों की बदलती भूमिका पर जोर देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “आज खेल एक पेशा है, इसलिए प्रतिभा की पहचान और पोषण को मजबूत करना आवश्यक है। सरकार को ऐसे अवसर और प्रणालियां बनाने में एक कदम आगे रहना होगा जो युवा प्रतिभाओं को जमीनी स्तर से उच्च स्तर तक प्रगति करने में सक्षम बनाएं।”

डॉ. मांडविया ने कहा कि खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से देश भर के एथलीटों को भारत के उच्च प्रदर्शन वाले खेल इको-सिस्टम को मजबूत करने और राष्ट्र के दीर्घकालिक खेल लक्ष्यों में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरणा मिलनी चाहिए।

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