सुप्रीम कोर्ट ने आज स्पष्ट किया है कि राज्य अब खनिज अधिकारों पर बकाया कर वसूल सकते हैं। एक अप्रैल, 2005 से पहले के खनिज अधिकारों पर ये लागू नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई को यह आदेश दिया था कि राज्यों के पास शक्ति है कि वे खनिज अधिकारों पर कर लगा सकें। खान और खनिज विनियमन और विकास अधिनियम 1957 राज्यों के अधिकारों को सीमित नहीं करता।
इस निर्णय के बाद केंद्रीय और अन्य करदाताओं ने ये मांग की कि इस निर्णय को तत्कालिक प्रभाव से लागू किया जाए।
लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 ध्वनिमत से पारित कर दिया है।…
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश को ईंधन…
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड-जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए…
वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने संसद में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का उल्लेख करते हुए…
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज दोपहर ‘मेरा बूथ,…
भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने आज नई दिल्ली में…