सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपूर्ति में कृत्रिम कमी पैदा होने से रोकने के लिए कई सक्रिय उपाय किए हैं। हाल के दिनों में मिल-द्वार चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि खुदरा चीनी की कीमतों में भी कमी आना शुरू हो गयी है। आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से कीमतों में होने वाले बदलावों के सामान्य हस्तांतरण को देखते हुए खुदरा कीमतों में भी शीघ्र ही मिल-द्वार कीमतों में आई गिरावट के अनुरूप कमी आने की उम्मीद है।
सरकार देश भर में चीनी की कीमतों, भंडार और आवाजाही पर लगातार निगरानी रख रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए कई सक्रिय उपाय कर रही है कि पर्याप्त उपलब्धता का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे। मिल-द्वार और खुदरा कीमतों में गिरावट का रूख दर्शाता है कि हाल में कीमतों में हुई तेज वृद्धि मुख्य रूप से जमाखोरी और सट्टेबाजी के कारण थी, जबकि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
भौतिक सत्यापन से पर्याप्त चीनी भंडार की पुष्टि
देशभर की चीनी मिलों में चीनी के भंडार के भौतिक सत्यापन के लिए चलाए गए अभियान से पर्याप्त उपलब्धता की स्थिति की पुन: पुष्टि हुई है। कई मामलों में चीनी मिलों उनके द्वारा सरकार को प्रस्तुत मासिक विवरणियों में घोषित मात्रा से अधिक भंडार पाया गया। इस सत्यापन के अभियान से यह स्पष्ट हुआ है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और इसलिए घबराकर में खरीदारी करने या आवश्यकता से अधिक भंडारण करने का कोई औचित्य नहीं है। कुछ मामलों में चीनी मिलों द्वारा कम बिक्री की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, अर्थात उन्हें मासिक कोटे के तहत जितनी मात्रा बेचने के लिए आवंटित की गयी थी, उससे कम मात्रा में चीनी बेची जा रही थी। पर्याप्त भौतिक भंडार होने के बावजूद इस तरह की गतिविधियां बाजार में चीनी की आपूर्ति अनावश्यक रूप से सीमित करती हैं।
सितंबर से पखवाड़ेवार चीनी कोटा प्रणाली
सरकार ने यह भी पाया है कि कुछ मामलों में महीने की शुरुआत में मिलों द्वारा बेची गई चीनी की आपूर्ति या उठान खरीदारों द्वारा महीने के अंत में किया जा रहा थ। इस प्रक्रिया से बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा हो रही थी। इन समस्याओं के समाधान और चीनी को समय पर बाजार तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सितंबर से पखवाड़ेवार चीनी आवंटन प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है। पखवाड़ेवार कोटे के तहत मिलों को आवंटित मात्रा में से कम से कम 40 प्रतिशत चीनी पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी।
पखवाड़ेवार प्रणाली से सरकार को निम्नलिखित में सहायता मिलेगी:
यह लचीली व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि चीनी की आपूर्ति वास्तविक घरेलू मांग के अनुरूप बनी रहे।
बिक्री के सात दिनों के भीतर चीनी की आपूर्ति करना अनिवार्य
चीनी मिलों को पहले ही निर्देश दिया जा चुका है कि बिक्री की गई चीनी को बिक्री के तारीख से सात दिनों के भीतर मिल से भेजना सुनिश्चित करें। पखवाड़ेवार कोटा आवंटन और सात दिनों के भीतर अनिवार्य प्रेषण की संयुक्त व्यवस्था से आपूर्ति श्रृंखला में चीनी की आवाजाही में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि चीनी मिलों से तेजी से डीलरों और अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचे। साथ ही, अनावश्यक रूप से भंडार जमा करने और सट्टा-आधारित भंडारण को हतोत्साहित करेगा। चीनी के थोक उपभोक्ताओं को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी परिचालन संबंधी आवश्यकताओं से अधिक मात्रा चीनी का भंडारण न करें।
नया चीनी मौसम उपलब्धता को और मजबूत करेगा
नए मौसम के लिए गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी। अक्टूबर महीने दौरान 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है। सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बिना किसी प्रतिबंध के बेचने की भी अनुमति दी है, जिससे नए मौसम का उत्पादन जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सके। नवंबर में चीनी का उत्पादन लगभग 45 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है, जिससे घरेलू खपत के लिए चीनी की अतिरिक्त आपूर्ति में पर्याप्त वृद्धि होगी।
सरकार ने उपभोक्ताओं को पर्याप्त चीनी उपलब्धता का आश्वासन दिया।
सरकार एक बार फिर उपभोक्ताओं को आश्वस्त करती है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और देशभर में, विशेष रूप से आगामी त्योहारी मौसम के दौरान, उचित कीमतों पर चीनी की पर्याप्त और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
मुख्य बिन्दु
नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 538 हो गई है।…
भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम के निधन पर शोक व्यक्त किया…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पश्चिम बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में अगस्त 2026 के पहले…
भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति -जेडीसी की प्रथम बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक…
रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन…