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संसद ने अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पारित किया

संसद ने अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। आज राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति और प्रशासन तथा कार्यप्रणाली में दक्षता सुधार, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। इस विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का भी प्रस्ताव है।

अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 2015 में अधिकरणों के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक, स्वतंत्र और एकरूप अधिकरण प्रणाली स्थापित करने के लिए अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 लाया गया है। श्री मेघवाल ने इस बात पर जोर दिया कि विधेयक का उद्देश्य शासन व्यवस्था को मजबूत करना, संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।

अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि नए विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का प्रावधान है, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश करेंगे। उन्‍होंने कहा कि यह सुधार न्याय की सुगमता, व्यापार करने में सुगमता और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इससे भारत की कानूनी तथा संस्थागत संरचना और मजबूत होगी । इसके अलावा सुलभ, समयबद्ध और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार की सामूहिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नया विधेयक 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और मजबूत करेगा।

इससे पहले, भाजपा के सुभाष बराला ने विधेयक पर चर्चा के दौरान इसका समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक न केवल अधिकरणों के प्रशासनिक कामकाज में बदलाव लाने के लिए है, बल्कि निष्पक्ष और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए भी है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश में हुए सुधारों को भी इस कानून से बल मिलेगा। सुभाष बराला ने बताया कि एक बार यह कानून अधिनियम बन जाने के बाद, अधिकरण प्रणाली और मजबूत होगी तथा विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होगा।

बीजू जनता दल के डॉ. सस्मित पात्रा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि अधिकरण सुधार केवल प्रशासनिक सुधार का विषय नहीं है, बल्कि यह न्यायिक संरचना का भी प्रश्न है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि 16 अधिकरणों के अलावा राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण को भी इस कानून में शामिल किया जाए, क्योंकि इससे दिवालियापन और दिवालिया संहिता की न्याय प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

डीएमके के तिरुचि शिवा ने कहा कि यह विधेयक अधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को निरस्त करके उसकी जगह नया विधेयक लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सरकार यह नया विधेयक इसलिए लाई है क्योंकि इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था। तिरुचि शिवा ने कहा कि इस विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का प्रस्ताव है।

भाजपा के महेश केवट ने कहा कि यह विधेयक देश की न्याय व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी, त्वरित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक तथा क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि अधिकरणों की स्थापना का मूल उद्देश्य कराधान, पर्यावरण, श्रम और प्रशासनिक मामलों जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में विवादों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना था। इसके अलावा, वाईएसआरसीपी के एस रेड्डी, ऑल इंडिया अन्‍ना डीएमके के आई.एस. इनबादुराई, एनसीपी के राजेंद्र हीरालाल जैन और तेलुगूदेशम पार्टी के भाष्यम रामकृष्ण सहित अन्य सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया।

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