सर्वोच्च न्यायालय ने लावारिस कुत्तों के बढ़ते खतरे से सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखने और राजमार्गों से लावारिस मवेशियों और अन्य पशुओं को हटाने के लिए आज कई दिशा-निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी अंजारिया की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए देश में लावारिस कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मामले की सुनवाई की।
न्यायालय प्रत्येक शैक्षिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए उपयुक्त तरीके से बाड़ लगाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने पशु जन्म नियंत्रण निमय, 2023 के अंतर्गत स्थानीय नगर निकायों से ऐसे जगहों से पशुओं को नियमित रूप से उठाकर आवश्यक टीककरण और नसबंदी के बाद निर्धारित आश्रय स्थलों पर भेजने को कहा है।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं। अन्यथा ये अधिकारी इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। सर्वोच्च न्यायालय को इन दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में आठ सप्ताह के भीतर अनुपालन स्थिति रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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