सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में उत्पन्न होने वाले ठोस कचरे को संसाधित करने में विफलता को लेकर सोमवार को अधिकारियों को लताड़ लगाई और इसे ‘खेदजनक स्थिति’ करार दिया। शीर्ष अदालत ने पाया कि राष्ट्रीय राजधानी में हर दिन तीन हजार टन ठोस कचरा अनुपचारित रह जाता है।
न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) सहित विभिन्न प्राधिकरणों की ओर से पेश हुए वकीलों से पूछा,”इसका समाधान क्या है।” पीठ ने कहा कि नगर निगम के ठोस कचरे के प्रसंस्करण का मुद्दा राष्ट्रीय राजधानी के लिए बेहद अहम है, इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और दिन के वक्त इस मुद्दे पर फिर सुनवाई होगी।
भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड (आईआरईडीए) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास…
भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनना और 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था…
भारत ने कल नागपुर में पांच ट्वेंटी–ट्वेंटी मैच की क्रिकेट श्रृंखला के पहले मुकाबले में…
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद –आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड –बीसीबी के ट्वेंटी–ट्वेंटी विश्व कप मैचों को…
राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड के संबंध में मांगों के बाद यूरोपीय संसद ने अमरीका के…
अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने के…